आर्टिफिशियल इंजीनियर अतुल सुभाष की आत्महत्या का मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। लोग भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए के दुरुपयोग पर सवाल उठा रहे हैं। अतुल का केस लड़ने वाले वकील दिनेश मिश्रा ने खुलासा किया है कि उनकी आत्महत्या का कारण कोर्ट का आदेश नहीं था।
मामले की जानकारी
वकील ने बताया कि अतुल और उनकी पत्नी निकिता दोनों आर्थिक रूप से मजबूत थे। निकिता दिल्ली में एक अच्छी नौकरी करती थीं, जबकि अतुल बेंगलुरु में काम कर 84,000 रुपये महीने कमाते थे। फैमिली कोर्ट ने अतुल को उनके बेटे के लिए हर महीने 40,000 रुपये गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद अतुल के पास अपने और अपने परिवार के खर्च के लिए केवल 44,000 रुपये बचते थे।
निकिता सिंघानिया के आरोप
निकिता ने शिकायत में कहा कि अतुल ने शादी के बाद उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अतुल उनकी पूरी सैलरी जबरदस्ती अपने खाते में ट्रांसफर करवाते थे। निकिता ने 2022 में अतुल, उनके भाई और माता-पिता के खिलाफ दहेज उत्पीड़न की एफआईआर दर्ज कराई थी।
विवाद और तलाक की कोशिश
निकिता के मुताबिक, उनकी शादी 26 अप्रैल 2019 को हुई थी। शादी के बाद अतुल और उनके परिवार ने दहेज में 10 लाख रुपये की मांग की। रिश्तेदारों का कहना है कि निकिता पिछले दो साल से तलाक लेने की कोशिश कर रही थीं।
इस मामले ने समाज और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, लेकिन वकील का मानना है कि आत्महत्या का दोष कोर्ट या कानून को नहीं दिया जा सकता।
