अमेरिकी अर्थव्यवस्था हाल ही में बहुत अच्छी स्थिति में थी, लेकिन अब मंदी को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। कुछ ही हफ्ते पहले शेयर बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर था, और अर्थव्यवस्था तेज गति से बढ़ रही थी। लेकिन अब मंदी की चर्चा जोरों पर है, शेयर बाजार में गिरावट आई है, और जीडीपी अनुमान भी घटाए जा रहे हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी आर्थिक नीतियों पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने खुद भी मंदी की आशंका को नकारा नहीं है, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई। नतीजा यह हुआ कि सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। S&P 500 इंडेक्स में करीब 3% और Nasdaq में 4% की गिरावट आई, जो 2022 के बाद की सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था फिलहाल मंदी के दौर में नहीं है, लेकिन जोखिम बढ़ रहा है। आमतौर पर मंदी के संकेत तब मिलते हैं जब बड़े पैमाने पर नौकरियां जाती हैं और कंपनियां दिवालिया होती हैं। हालांकि, मौजूदा हालात में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, जिससे निवेशक और उपभोक्ता सतर्क हो गए हैं।
इस अनिश्चितता की एक बड़ी वजह ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीतियां हैं। बार-बार बदलते फैसलों के कारण निवेशकों और कंपनियों का भरोसा कमजोर पड़ रहा है। टैरिफ बढ़ने से वस्तुओं की कीमतें बढ़ती हैं, जिससे मांग कम हो जाती है और आर्थिक विकास प्रभावित होता है। इसी कारण कंपनियां निवेश रोक रही हैं और उपभोक्ता खर्च में कटौती कर रहे हैं।
इसका असर कॉर्पोरेट क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। डेल्टा एयरलाइंस जैसी कंपनियां मुनाफे को लेकर सतर्क हो गई हैं, और व्यापार जगत में अनिश्चितता के कारण कई कंपनियां दिवालिया हो रही हैं। S&P ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस के अनुसार, 2025 के पहले दो महीनों में ही 129 अमेरिकी कंपनियां दिवालिया हो चुकी हैं, जो 2010 के बाद सबसे ज्यादा है।
बड़ी निवेश फर्मों ने भी मंदी की संभावना बढ़ा दी है। गोल्डमैन सैश के अनुसार, अगले 12 महीनों में मंदी की संभावना अब 20% तक पहुंच गई है, जो पहले 15% थी। उनका कहना है कि अगर व्हाइट हाउस अपनी मौजूदा नीतियों को जारी रखता है, तो आर्थिक संकट और गहरा सकता है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था की यह स्थिति दिखाती है कि निवेशकों और उपभोक्ताओं का भरोसा कितना अहम होता है। अगर बाजार में अनिश्चितता बनी रहती है, तो मंदी का खतरा और बढ़ सकता है।
