दिल्ली शराब नीति मामले में सीबीआई केस के तहत मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को शुक्रवार, 13 अगस्त 2024 को जमानत मिल गई। इसके तुरंत बाद उनके वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने चल रही अफवाहों का खंडन करते हुए कहा कि कुछ लोग गलत दावा कर रहे हैं कि जमानत पर रहने के दौरान केजरीवाल किसी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं कर सकते। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने 12 जुलाई को पीएमएलए मामले में दिए गए अपने पिछले आदेश में कोई परिवर्तन नहीं किया है। सिंघवी का यह बयान सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के कुछ घंटों बाद सामने आया।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने स्पष्ट किया कि गलत जानकारी फैलाई जा रही है कि केजरीवाल अब किसी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि केजरीवाल सभी फाइलों पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, बस शराब नीति मामले से जुड़ी फाइलों पर उनके हस्ताक्षर नहीं होंगे, क्योंकि इसी मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
सिंघवी ने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कोई नई शर्त नहीं लगाई है, जिससे उनके काम पर कोई रोक लगे। उन्होंने कहा कि यह गलत धारणा है कि केजरीवाल मुख्यमंत्री के रूप में कार्य नहीं कर सकते। वे सिर्फ शराब नीति से जुड़े मामलों को छोड़कर बाकी सभी फाइलों पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, जैसा पहले से हो रहा था।
वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 12 जुलाई के आदेश में यह साफ कहा गया है कि अरविंद केजरीवाल उन दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर कर सकते हैं जो उपराज्यपाल के पास भेजे जाएंगे, जबकि बाकी दस्तावेज़ों पर उनके मंत्री हस्ताक्षर करेंगे। यह कहना कि वे काम नहीं कर सकते, सिर्फ राजनीति है। उन्होंने कहा कि एक चुने हुए मुख्यमंत्री को इस तरह से हटाना सही नहीं है।
दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की गैरमौजूदगी से कोई राजनीतिक संकट नहीं होगा, क्योंकि अब वे जेल से बाहर हैं और उनके मंत्री सरकार का कामकाज संभाल रहे हैं। केजरीवाल खुद भी उपराज्यपाल के लिए दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत के लिए दो शर्तें रखी हैं। पहली, उन्हें हर सुनवाई पर निचली अदालत में हाज़िर रहना होगा, और दूसरी, वे मुकदमे की प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेंगे। हालांकि, पहले की शर्तों को केवल संविधान पीठ ही बदल सकती है, इसलिए उन्हें फाइलों पर हस्ताक्षर करने की अनुमति दी गई है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को मुख्यमंत्री कार्यालय और सचिवालय में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। वह तब तक किसी भी सरकारी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे जब तक कि उपराज्यपाल से इसकी मंजूरी आवश्यक न हो। शराब नीति से जुड़े मामले पर वह कोई बयान नहीं देंगे और न ही मामले के किसी गवाह से संपर्क करेंगे या आधिकारिक केस फाइलों को देख पाएंगे।
