समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के खिलाफ दर्ज कुल 12 मुकदमों में अदालतों ने बड़े फैसले सुना दिए हैं। सोमवार को जारी ताजा सुनवाई में उन्हें 7 मामलों में सजा मिली है, जबकि 5 मुकदमों में बरी कर दिया गया है।
सबसे अहम मामला दो पैन-कार्ड फर्जीवाड़े से जुड़ा है। कोर्ट ने आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दोनों मामलों में दोषी ठहराया है और 7-7 साल की कैद की सजा दी है। यह फैसला उन्हें रामपुर की जिला जेल में भेजे जाने के बाद आया है, जहां उनकी पहली रात बिताई गई।
जेल अधीक्षक की रिपोर्ट के मुताबिक, आजम खान को बैरक नंबर-1 में रखा गया है। उन्हें साधारण भोजन जैसे दाल-रोटी-सब्जी और सुबह चाय-बिस्किट मिला। उन्होंने कोई विशेष मांग नहीं की और उनकी पहली रात शांतिपूर्ण तरीके से गुजर गई।
इन 12 मुकदमों में सलग फैसलों का सिलसिला जारी है। 2005-2019 के बीच दर्ज किए गए अन्य मामलों में भी आजम को पहले ही सजा सुनाई जा चुकी है। उदाहरण के लिए, डूंगरपुर प्रकरण में उन्हें 10 साल की सजा हुई है। वहीं कुछ मामलों में उन्हें अदालतों से राहत भी मिली है — जैसे कि पड़ोसी से मारपीट या मानहानि के मुकदमे।
सजा के बाद आजम खान ने बयान दिया है कि “कोर्ट ने मुझे गुनहगार माना, लेकिन सबूत तो अल्लाह दे सकता है।” उनका कहना है कि उन्होंने अदालत के फैसले को स्वीकार किया है, लेकिन न्याय की उम्मीद अभी भी कायम है।
यह फैसला राजनीतिक रूप से भी बहुत मायने रखता है क्योंकि आजम खान यूपी में लंबे समय से सक्रिय हैं और उनके खिलाफ दर्ज केस उनकी भूमिका और पड़ोस में राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के लिए भी चर्चा का विषय रहे हैं। अब यह देखना होगा कि क्या ये सजा और बरी-फैसले उनकी सियासी पारी को प्रभावित करेंगे।
