जिसने भी जन्म लिया है, उसकी मृत्यु निश्चित है। यह सृष्टि का अटल नियम है। लेकिन मृत्यु के बाद आत्मा का क्या होता है? क्या वह तुरंत नए शरीर में प्रवेश करती है, या फिर उसे इंतजार करना पड़ता है? गरुड़ ने भगवान विष्णु से ऐसे ही सवाल पूछे, और भगवान ने इनका विस्तार से उत्तर दिया।
आत्मा शरीर से कैसे निकलती है?
भगवान विष्णु ने बताया कि मृत्यु के समय आत्मा विभिन्न मार्गों से शरीर छोड़ती है। ज्ञानियों की आत्मा मस्तिष्क के ऊपरी हिस्से से निकलती है, जबकि पापियों की आत्मा निचले हिस्से से बाहर जाती है।
मृत्यु के बाद आत्मा की स्थिति
मृत्यु के बाद आत्मा तीन दिनों तक अग्नि में और तीन दिनों तक घर में स्थित जल में रहती है। जब मृतक के परिजन वैदिक अनुष्ठान करते हैं, तो दसवें दिन आत्मा को अंगूठे के आकार का अल्पकालिक शरीर मिलता है। इस शरीर के साथ वह यमलोक की यात्रा शुरू करती है और तेरहवें दिन वहां पहुंचती है।
कर्मों के आधार पर निर्णय
यमलोक में चित्रगुप्त जीव के कर्मों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हैं। यमराज इन कर्मों के आधार पर आत्मा को स्वर्ग या नरक में भेजते हैं। कर्मों के प्रभाव समाप्त होने पर आत्मा को पृथ्वी पर नए शरीर में जन्म मिलता है।
प्रेत योनि का कारण
कुछ आत्माओं को प्रेत योनि में भेजा जाता है। यह स्थिति तब आती है, जब किसी का जीवनकाल अधूरा रह जाता है, जैसे आत्महत्या के मामले में। उदाहरणस्वरूप, अगर किसी का जीवन 60 वर्षों का था और वह 45 साल में मर गया, तो उसे 15 साल प्रेत योनि में बिताने पड़ सकते हैं।
प्रेत योनि का स्वरूप
प्रेत योनि में आत्मा एक सूक्ष्म शरीर में रहती है। उसकी इच्छाएं वही रहती हैं जो मानव रूप में थीं, लेकिन वह उन्हें पूरा नहीं कर पाती। यह स्थिति आत्मा के लिए पीड़ादायक होती है।
भगवान के भक्तों की स्थिति
भगवान के भक्तों को प्रेत योनि या यमलोक का सामना नहीं करना पड़ता। उनकी आत्मा को भगवान के दूत स्वर्ग लेकर जाते हैं, जहां वह जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाती है।
