उत्तर कोरिया के साथ भारत की नई कूटनीति: सामरिक महत्व और रणनीतिक कदम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर गहरी नजर रखते हैं और हर परिस्थिति के अनुसार अपनी नीतियां तय करते हैं। जब दुनिया का ध्यान यूरोप, मध्य पूर्व और एशिया में जारी संघर्षों पर केंद्रित है, भारत अपनी “एक्ट ईस्ट” नीति के तहत पूर्वी देशों के साथ अपने संबंध मजबूत करने में जुटा है।

भारत दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ संबंध सुधारने के साथ-साथ कोरियाई प्रायद्वीप में भी चुपचाप अपनी रणनीति पर काम कर रहा है। उत्तर कोरिया, जो अपनी गुप्त रणनीतियों के लिए जाना जाता है, के साथ भारत ने अपने राजनयिक संबंध बड़ी सावधानी से बनाए रखे हैं।

जुलाई 2021 में, कोविड-19 के कारण भारत ने प्योंगयांग स्थित अपना दूतावास अस्थायी रूप से बंद कर दिया था। हालांकि, इस साल भारत ने फिर से उत्तर कोरिया में अपना दूतावास शुरू करने का निर्णय लिया और एक टीम को वहां भेजा।

उत्तर कोरिया का भारत के लिए सामरिक महत्व बढ़ गया है, खासकर उसकी बढ़ती सैन्य ताकत और परमाणु हथियारों के कारण। भारत के लिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि उत्तर कोरिया की तकनीक पाकिस्तान या किसी अनचाहे समूह के हाथ न लगे।

इसके अलावा, उत्तर कोरिया ने रूस, चीन और ईरान के साथ अपने संबंध मजबूत किए हैं, जो एक नए गठबंधन का संकेत है। भारत को इस गठबंधन के संभावित प्रभावों को ध्यान में रखते हुए अपनी कूटनीति को और मजबूत करना होगा।

भारत के रूस और ईरान के साथ पहले से अच्छे संबंध हैं, और चीन के साथ भी मतभेद कम करने की कोशिश जारी है। इस संदर्भ में, प्योंगयांग के साथ भारत का संतुलित और सावधान रिश्ता एशिया में शांति और स्थिरता के लिए अहम है।

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