उत्तर प्रदेश की आर्थिक वृद्धि को एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रदेश में मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स की संख्या बढ़ाने की योजना है। इसके तहत, प्रदेश सरकार औद्योगिक प्राधिकरण क्षेत्रों में ऑपरेशनल और नॉन-ऑपरेशनल इकाइयों का एक व्यापक सर्वे करवाएगी। इस काम की जिम्मेदारी यूपी इन्वेस्ट को सौंपी गई है, जो विभिन्न एजेंसियों का चयन करेगी। सर्वे को चार महीनों में पूरा करना है। इस सर्वे से प्राप्त जानकारी का उपयोग नॉन-ऑपरेशनल यूनिट्स के लैंड बैंक का इस्तेमाल करके अन्य मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए किया जाएगा।
सर्वे प्रदेश के सात प्रमुख औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में किया जाएगा, जिनमें नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना विकास प्राधिकरण शामिल हैं। इन क्षेत्रों में लगभग 15,000 इकाइयां हैं। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण, गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण, यूपी एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण, और सतहरिया औद्योगिक विकास प्राधिकरण भी इस सर्वे का हिस्सा होंगे।
सर्वेक्षण के दौरान, औद्योगिक भूखंडों के आकार, भूमि उपयोग, श्रेणी, परिचालन स्थिति, कर्मचारियों की संख्या, और उत्पादों की जानकारी एकत्र की जाएगी। मुख्य उद्देश्य यह पहचानना है कि कौन से भूखंड फंक्शनल, नॉन-फंक्शनल, निष्क्रिय या खाली हैं। इस सर्वे की निगरानी और निष्पादन इन्वेस्ट यूपी द्वारा किया जाएगा। डेटा संग्रहण के लिए एक मोबाइल एप्लिकेशन भी विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से एजेंसियां वास्तविक समय की जानकारी दर्ज करेंगी, जिसे बाद में सत्यापित और विश्लेषित किया जाएगा।
