बिहार में एनडीए के सीट बंटवारे से तेजस्वी यादव को बड़ी राहत मिली है। एनडीए में भाजपा और जेडीयू ने बराबर-बराबर यानी 101–101 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है, जबकि चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी को 29 सीटें मिली हैं। अब जब एनडीए की सीटें तय हो गई हैं, तो किसी नए दल के लिए वहां जगह नहीं बची है। इससे मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी के लिए एनडीए में जाना मुश्किल हो गया है।
तेजस्वी यादव के लिए यह राहत इसलिए है क्योंकि पिछले कुछ समय से मुकेश सहनी लगातार महागठबंधन में ज्यादा सीटें मांग रहे थे और दबाव बना रहे थे। वे यह भी कह चुके थे कि अगर उनकी बात नहीं मानी गई तो वे दूसरा रास्ता चुन सकते हैं। अब एनडीए में सीटें तय हो जाने से उनके पास बहुत विकल्प नहीं बचे हैं।
इससे तेजस्वी यादव पर से दबाव कम हो गया है और अब वे शांति से अपनी चुनावी तैयारी पर ध्यान दे सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भले ही एनडीए को सीटें तय करने में देरी हुई, लेकिन इस देरी से तेजस्वी को भी सुकून मिला है। अब वे बिना किसी दबाव के अपनी रणनीति बना सकते हैं।
