लखनऊ, 19 जून।
कैश कांड में पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एस.एन. वर्मा के खिलाफ जांच कमेटी की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि वर्मा के घर के स्टोर रूम में रखे गए कैश को कम से कम 10 लोगों ने देखा था। यह वही मामला है जिसमें उनके परिवार और उनसे जुड़े लोगों पर बेहिसाब नकदी रखने का आरोप लगा था।
जांच समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारी मात्रा में नकदी को छिपाकर रखा गया था, जिसे कुछ नौकरों, रिश्तेदारों और अन्य करीबियों ने देखा था। कमेटी ने अपने दस्तावेजों में जिन 10 लोगों का जिक्र किया है, वे सभी प्रत्यक्षदर्शी माने जा रहे हैं।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि स्टोर रूम में रखे नोटों की गिनती नहीं की गई थी, लेकिन यह रकम करोड़ों में आंकी गई है। जस्टिस वर्मा के खिलाफ यह आरोप है कि उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद भी प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए यह नकदी रखी और किसी भी विभाग को इसकी जानकारी नहीं दी।
कमेटी ने सुझाव दिया है कि इस मामले की ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) और आयकर विभाग से गहन जांच करवाई जाए, ताकि यह पता चल सके कि यह पैसा कहां से आया और इसका इस्तेमाल कहां होना था।
जांच रिपोर्ट की 10 अहम बातें:
1. स्टोर रूम में कैश देखने वाले 10 लोगों की पहचान हुई है।
2. नकदी की मात्रा करोड़ों में होने का अनुमान।
3. जस्टिस वर्मा के प्रभाव का इस्तेमाल कर कैश छिपाने का आरोप।
4. कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं किया गया।
5. स्टाफ और घरेलू नौकरों ने कैश की मौजूदगी की पुष्टि की।
6. नोटों की गड्डियां बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के रखी गई थीं।
7. परिवार के कुछ सदस्य इस नकदी से अनजान थे।
8. जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान लिए गए।
9. कमेटी ने रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी है।
10. ईडी और आयकर विभाग को जांच की सिफारिश की गई है।
अब देखना यह है कि सरकार इस रिपोर्ट के आधार पर क्या कदम उठाती है। जस्टिस वर्मा की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
