ग्रेटर नोएडा के दनकौर थाना क्षेत्र के नवादा गांव में हालात बेहद खराब हो चुके हैं। गांव की गलियों और नालियों से लेकर रजवाहे तक गंदगी का अंबार जमा है। जगह-जगह रुका हुआ गंदा पानी और नालियों में फैली दुर्गंध ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। इस गंदगी ने अब बीमारी का रूप ले लिया है। डेंगू और मलेरिया के मच्छरों ने गांव को अपनी चपेट में ले लिया है। नतीजा यह है कि कई लोग इन बीमारियों से पीड़ित होकर बिस्तर पकड़ चुके हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्राधिकरण और सिंचाई विभाग को शिकायत दी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। गांव में अब हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है, लेकिन गांव की सफाई को लेकर जिम्मेदार विभाग चुप्पी साधे बैठे हैं।
नवादा गांव ही नहीं, बल्कि इसके आसपास के कई और गांव भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं। पास का जुनपत गांव इसका बड़ा उदाहरण है, जहां नहर की सफाई को सालों बीत गए, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। नहरों और रजवाहों में जमी गंदगी मच्छरों का घर बन चुकी है। ग्रामीण बताते हैं कि बरसात का पानी और गंदगी नालियों में महीनों तक जमा रहती है। ऐसे में डेंगू-मलेरिया का खतरा हर साल बढ़ जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन सिर्फ आश्वासन देता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं किया जाता। लोग मांग कर रहे हैं कि तुरंत गांवों में साफ-सफाई करवाई जाए। नालियों और रजवाहों की नियमित सफाई हो और मच्छरों को खत्म करने के लिए दवाई का छिड़काव कराया जाए।
नवादा गांव के रहने वाले एक बुजुर्ग ने कहा, “गंदगी से हमारी जिंदगी नरक बन गई है। बच्चे बीमार हो रहे हैं और हम हर रोज अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं। अगर यही हाल रहा तो बीमारी और फैलेगी।”
ग्रामीणों की यह आवाज अब लगातार उठ रही है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी शिकायतों पर ध्यान देकर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। वरना आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
यह कहानी साफ बताती है कि गांवों में गंदगी और लापरवाही मिलकर किस तरह से बड़ी समस्या बन जाती है और आम जनता की जिंदगी को खतरे में डाल देती है।
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