गाजियाबाद के नंदग्राम क्षेत्र में एक बड़ा लोन फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसमें मुख्य आरोपी लक्ष्य तंवर और उसके साथियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। राजनगर एक्सटेंशन के रहने वाले अनुज शर्मा नाम के एक व्यक्ति ने इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है।
कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
अनुज शर्मा “सिद्ध इंटरप्राइजेज” नाम की एक फर्म चलाते थे, लेकिन भारी नुकसान के कारण वे आर्थिक तंगी में आ गए। इस स्थिति से उबरने के लिए उन्होंने अपने ममेरे भाई संजीव शर्मा से मदद मांगी। संजीव ने उन्हें लक्ष्य तंवर से मिलवाया, जिसने मदद के नाम पर अनुज शर्मा की नोएडा एक्सटेंशन स्थित संपत्ति के दस्तावेज अपने पास रख लिए और बदले में 12 लाख रुपये उधार दिए।
हालांकि, जब अनुज ब्याज चुकाने में असमर्थ हो गए, तो संजीव शर्मा ने उन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। इसके बाद, लक्ष्य तंवर ने मार्च 2016 में अनुज की फर्म “सिद्ध इंटरप्राइजेज” के नाम पर 10 लाख रुपये का मुद्रा लोन दिलवा दिया और उनके बैंक खाते की चेकबुक पर हस्ताक्षर करवा लिए।
2.75 करोड़ रुपये का बड़ा घोटाला
आरोप है कि लक्ष्य तंवर और उसके साथियों ने इसी प्रक्रिया का फायदा उठाकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और चंद्रनगर स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से “अनुज इंटरप्राइजेज” नाम की एक फर्जी फर्म बनाकर 2.75 करोड़ रुपये का लोन ले लिया।
हैरानी की बात यह है कि इस लोन में जिन विनीता छाबड़ा और सीता मेहता को गारंटर बनाया गया, उन्हें अनुज शर्मा जान तक नहीं पाए। जांच में पता चला कि ये दोनों भी लक्ष्य तंवर के गिरोह का हिस्सा थीं।
जांच जारी पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
