गांधीनगर। गुजरात के गिर वन और सौराष्ट्र के इलाकों में एशियाई शेरों की आबादी में ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राज्य सरकार द्वारा जारी 16वें शेर गणना के नतीजों के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में शेरों की संख्या 674 से बढ़कर 891 हो गई है, यानी 32.2% का इज़ाफ़ा। यह वृद्धि वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक, मौजूदा आबादी में 196 नर, 330 मादाएं, 140 अधयौवन और 225 शावक शामिल हैं। खास बात यह है कि इनमें से 507 शेर संरक्षित क्षेत्रों से बाहर सौराष्ट्र के 11 ज़िलों में फैले हुए हैं, जबकि 384 अब भी गिर नेशनल पार्क और वाइल्डलाइफ़ सेंक्चुरी में ही बसे हैं।
पिछले पाँच वर्षों में शेरों के आवासीय क्षेत्र का दायरा 35,000 वर्ग किलोमीटर तक फैल गया है, जो 2015 की तुलना में 17% अधिक है। नवनिर्दिष्ट इलाकों में बरड़ा वाइल्डलाइफ़ सेंक्चुरी, जेटपुर और बाबरा-जसदण जैसे इलाके भी शामिल हैं। अमरेली में शेरों की संख्या में 45.5% और भावनगर में 43% की वृद्धि दर्ज हुई है।
वन विभाग और स्थानीय समुदायों के संयुक्त प्रयास, “प्रोजेक्ट लायन” और निरंतर निगरानी व्यवस्था ने इस सफलता में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि सीमित भौगोलिक क्षेत्र में इतनी बड़ी आबादी से जनेटिक विविधता पर असर पड़ सकता है। इसलिए अन्य राज्यों में पुनर्स्थापन की योजना को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
