ग्रेटर नोएडा, 2 अक्तूबर।
ग्रेटर नोएडा कालीबाड़ी में इस बार की दुर्गा पूजा बेहद खास रही। रजत जयंती वर्ष में आयोजित यह शारदोत्सव अपने अंतिम दिन यानी विजयादशमी पर भक्ति, उल्लास और भावनाओं का अद्भुत संगम बन गया। सुबह से ही माहौल धार्मिक रंग में डूबा रहा। शुभ दशमी की पूजा संपन्न हुई और सैकड़ों श्रद्धालुओं ने माँ दुर्गा को पुष्पांजलि अर्पित कर आशीर्वाद लिया।
महिलाओं के बीच पारंपरिक सिंदूर खेला का आयोजन हुआ, जिसमें सबने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर परिवार की समृद्धि और खुशहाली की कामनाएँ कीं। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उत्सव की रौनक और बढ़ा दी। धुनुची नृत्य और ढाक वादन प्रतियोगिता ने माहौल को और उत्साहपूर्ण बना दिया। प्रतिभागियों ने अपनी भक्ति और लय से उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
जैसे-जैसे दिन ढलने लगा, वातावरण में भावुकता घुलने लगी। भक्त माँ को विदाई देने के लिए एकत्र हुए। आँखों में आँसू और दिल में श्रद्धा लिए सभी ने देवी को विदा किया। खास बात यह रही कि इस बार विसर्जन कालीबाड़ी परिसर में ही बनाए गए कृत्रिम तालाब में किया गया। यह कदम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय पहल साबित हुआ, जिससे नदियों को प्रदूषण से बचाया जा सका।
इस अवसर पर ग्रेटर नोएडा शारदिया सांस्कृतिक समिति के महासचिव देबकी घोषाल ने कहा कि दशमी हमेशा भावुक क्षण लेकर आती है। जहाँ माँ के प्रस्थान का दुख है, वहीं उनके आशीर्वाद और आनंद की स्मृतियाँ हमारे साथ रहती हैं। उन्होंने कहा कि कृत्रिम तालाब बनाकर हमने आने वाले वर्षों के लिए एक नई परंपरा की शुरुआत की है।
माँ दुर्गा के जयघोष के साथ जैसे ही देवी को विदा किया गया, वैसे ही रजत जयंती शारदोत्सव का भव्य समापन हुआ। यह विदाई जहाँ एक ओर भक्तों को भावुक कर गई, वहीं दूसरी ओर उन्हें अगले वर्ष तक के इंतज़ार का संदेश भी दे गई।
