ग्रेटर नोएडा: वॉटर ड्रेन चेंबर ढक्कनों में छेद घटने पर उठे सवाल, जांच की मांग

ग्रेटर नोएडा के कई सेक्टरों में लगे वॉटर ड्रेन चेंबर के ढक्कनों को लेकर स्थानीय लोगों में नाराज़गी और चिंता बढ़ गई है। पहले इन ढक्कनों में करीब 25 छेद होते थे, जिनसे बारिश का पानी आसानी से सड़क से निकलकर ड्रेन में चला जाता था। इससे पानी भरने की समस्या कम हो जाती थी। लेकिन अब नए लगाए जा रहे ढक्कनों में केवल 5 से 6 छेद ही बनाए जा रहे हैं।

लोगों का कहना है कि यह बदलाव पूरी तरह गलत दिशा में है। जब शहर की आबादी बढ़ रही है, मकान और कॉलोनियां तेज़ी से बस रही हैं, तो पानी निकासी की क्षमता और बढ़ाई जानी चाहिए थी, न कि घटाई जाए। पहले के ढक्कनों में अधिक छेद होने से पानी का बहाव तेज़ रहता था, जबकि अब कम छेद होने से पानी निकासी धीमी होगी और सड़कों पर जलभराव की समस्या बढ़ सकती है।

सामाजिक कार्यकर्ता हरेन्द्र भाटी ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यह केवल इंजीनियरिंग की गलती नहीं लगती, बल्कि किसी साज़िश या घोटाले का हिस्सा भी हो सकता है। उनके मुताबिक, अगर पानी की निकासी ठीक से नहीं होगी, तो भविष्य में नए संसाधन बनाने की ज़रूरत होगी, जिससे भ्रष्टाचार के अवसर बढ़ेंगे।

स्थानीय निवासियों ने सवाल उठाया है कि आखिर किस इंजीनियर ने इस डिज़ाइन को पास किया। लोग चाहते हैं कि नगर प्राधिकरण पारदर्शिता दिखाते हुए उस इंजीनियर का नाम सार्वजनिक करे और इस डिज़ाइन में बदलाव के पीछे की वजह स्पष्ट करे।

बारिश के दिनों में पहले से ही शहर के कई इलाकों में जलभराव की समस्या देखने को मिलती है। ऐसे में ड्रेन ढक्कनों के छेद घटाना लोगों की परेशानी और बढ़ा सकता है। नागरिकों का कहना है कि अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह आने वाले दिनों में बड़े पैमाने पर यातायात और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है।

लोगों ने मांग की है कि पुराने ढक्कनों की तरह अधिक छेद वाले ढक्कन लगाए जाएं और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, ताकि जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जा सके।

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