ग्रेटर नोएडा को एक विकसित और स्मार्ट सिटी के रूप में जाना जाता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे एकदम उलट है। शहर के पॉश सेक्टरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक, हर जगह गंदगी का साम्राज्य फैल चुका है। अल्फा-1, अल्फा-2, डेल्टा-1, बीटा जैसे सेक्टरों में भी जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। वहीं दूसरी ओर हबीबपुर, बिसरख, इचेड़ा जैसे गांवों की हालत और भी ज्यादा खराब है।
गांवों में गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक नालियां ओवरफ्लो हो रही हैं और कूड़ा कई दिनों तक नहीं उठाया जाता। चारों तरफ गंदगी और बदबू से लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं बीमार हो रहे हैं। मच्छर और कीड़े लगातार बढ़ते जा रहे हैं जिससे डेंगू, मलेरिया और पेट की बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर प्राधिकरण सिर्फ फाइलों और सोशल मीडिया पर सफाई दिखा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। सफाईकर्मी समय पर नहीं आते और कूड़ा गाड़ी हफ्तों तक गायब रहती है। कई जगहों पर तो कूड़ा खुले में जलाया जा रहा है, जिससे प्रदूषण भी बढ़ रहा है।
लोगों ने कई बार शिकायत की, लेकिन अधिकारियों की ओर से सिर्फ आश्वासन ही मिला। अब जनता में नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीणों और सेक्टरवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सफाई की व्यवस्था नहीं सुधरी, तो वे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
ग्रेटर नोएडा जैसे प्लान्ड शहर की जब ये हालत है, तो सवाल उठता है कि यहां की प्रशासनिक व्यवस्था कितनी कमजोर है? लोगों की मांग है कि नगर प्राधिकरण पूरे शहर में विशेष स्वच्छता अभियान चलाए, सफाई कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए और कूड़ा प्रबंधन को गंभीरता से लिया जाए, ताकि लोग साफ-सुथरे और स्वस्थ वातावरण में जी सकें।
