‘ छावा’ फिल्म विवाद: नागपुर में हिंसा भड़की, राजनीतिक हलचल तेज

हाल ही में नागपुर में हुई हिंसा का केंद्र बिंदु फिल्म ‘छावा’ बनी है, जो मराठा योद्धा छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन पर आधारित है। फिल्म में संभाजी महाराज की हत्या के लिए मुगल सम्राट औरंगजेब की क्रूरता को दर्शाया गया है, जिससे कुछ समुदायों में आक्रोश उत्पन्न हुआ है।

हिंसा की शुरुआत:

17 मार्च की शाम नागपुर के चिटनिस पार्क क्षेत्र में ‘छावा’ फिल्म के प्रदर्शन के बाद तनाव बढ़ा। फिल्म में दिखाई गई ऐतिहासिक घटनाओं ने स्थानीय समुदायों के बीच असंतोष को जन्म दिया, जो बाद में हिंसा में परिवर्तित हो गया। 18 मार्च को विधानसभा में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस हिंसा को एक सोची-समझी साजिश करार दिया और कहा कि भीड़ ने पूर्व-नियोजित तरीके से घरों और दुकानों को निशाना बनाया।

मुख्यमंत्री का बयान:

मुख्यमंत्री फडणवीस ने विधानसभा में कहा कि ‘छावा’ फिल्म में मराठा राजा की सच्ची कहानी पेश की गई है, जिससे लोग औरंगजेब के प्रति गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। उन्होंने हिंसा के लिए अफवाहों को भी जिम्मेदार ठहराया और कहा कि महाराष्ट्र में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि दंगों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, चाहे उनकी जाति या धर्म कुछ भी हो।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ:

शिवसेना ने मुख्यमंत्री फडणवीस के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि नागपुर दंगों का ठीकरा ‘छावा’ फिल्म पर फोड़ना उनके कमजोर मनोबल का संकेत देता है। शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय में व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा गया कि क्या भाजपा नीत सरकार फिल्म के अभिनेताओं, निर्देशक और निर्माताओं के खिलाफ मामला दर्ज करने की योजना बना रही है। संपादकीय में यह भी कहा गया कि अगर पहले के लेखन से दंगे नहीं भड़के, तो अब एक फिल्म देखकर लोगों ने दंगे क्यों किए?

धार्मिक नेताओं की प्रतिक्रिया:

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने नागपुर हिंसा को लेकर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने इस हिंसा के लिए हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म ‘छावा’ को ज़िम्मेदार ठहराते हुए इस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँ:

नागपुर हिंसा के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बहस छिड़ गई है। कुछ उपयोगकर्ता मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए विक्की कौशल और फिल्म निर्माताओं को दोषी मान रहे हैं, जबकि अन्य उनके समर्थन में उतर आए हैं। कुछ ने फिल्म को ऐतिहासिक सच्चाई दिखाने वाला बताया है, तो कुछ ने इसे सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने वाला करार दिया है।

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