जगद्गुरु रामभद्राचार्य को 58वां ज्ञानपीठ पुरस्कार: संस्कृत साहित्य को मिला गौरव

प्रख्यात संस्कृत विद्वान और आध्यात्मिक गुरु जगद्गुरु रामभद्राचार्य को वर्ष 2023 के लिए 58वां ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया है। यह सम्मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा 16 मई 2025 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदान किया गया।

पुरस्कार का महत्व

ज्ञानपीठ पुरस्कार भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है, जो भारतीय भाषाओं में उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए दिया जाता है। इस पुरस्कार में 11 लाख रुपये की नकद राशि, वाग्देवी (सरस्वती) की कांस्य प्रतिमा और एक प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है।

रामभद्राचार्य जी का योगदान

जन्म से दृष्टिहीन होने के बावजूद, जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने वेद, उपनिषद, महाकाव्य और भारतीय दर्शन में असाधारण विद्वता अर्जित की है। उन्होंने संस्कृत सहित कई भाषाओं में काव्य, आलोचना और धार्मिक ग्रंथों की रचना की है, जिनमें ज्ञान, भक्ति और भारतीय परंपरा का गहन समावेश देखने को मिलता है। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

सम्मान और प्रतिक्रियाएँ

इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मू ने उनके साहित्यिक योगदान और समाजसेवा की सराहना करते हुए कहा कि रामभद्राचार्य जी का जीवन प्रेरणास्रोत है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनका कालजयी रचना संसार वैश्विक साहित्य जगत के लिए अमूल्य धरोहर है।

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