उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक 18 वर्षीय छात्रा की आत्महत्या का दुखद मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि यह छात्रा एक प्राइवेट कोचिंग सेंटर में पढ़ाई कर रही थी और जेईई मेन्स परीक्षा में कम अंक आने के कारण उसने यह कदम उठाया।
इस घटना पर उद्योगपति और अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (Twitter) पर लिखा कि अपेक्षाओं के बोझ तले दबकर एक होनहार बेटी का यूं चले जाना बेहद दुखद है। उन्होंने सभी माता-पिता और छात्रों को संदेश देते हुए कहा कि जीवन किसी भी परीक्षा से बड़ा होता है और यह हमेशा दूसरा मौका देता है।
अडानी ने अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा कि वह पढ़ाई में बहुत सामान्य छात्र थे और कई बार असफल भी हुए, लेकिन हर बार जिंदगी ने उन्हें नया रास्ता दिखाया। उन्होंने आग्रह किया कि असफलता को अंतिम पड़ाव न समझें, क्योंकि जीवन आगे बढ़ने के मौके देता है।
छात्रा ने आत्महत्या से पहले अपने माता-पिता के लिए एक भावुक सुसाइड नोट छोड़ा। इसमें उसने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए लिखा कि “माफ करना मम्मी-पापा, मैं आपकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाई। मैंने बहुत कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सकी। आप दोनों ने मुझे बहुत प्यार दिया, कृपया दुखी मत होना”।
यह घटना परीक्षा के तनाव और अपेक्षाओं के बोझ तले छात्रों की मानसिक स्थिति को लेकर एक गंभीर संदेश देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि विद्यार्थियों को यह समझाने की जरूरत है कि एक परीक्षा जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं होती और माता-पिता को भी अपने बच्चों पर अनावश्यक दबाव नहीं डालना चाहिए।
