तापमान में उतार-चढ़ाव से,खरीफ फसलों को बाचाने के लिए कृषि विभाग ने विशेष एडवाइजरी जारी की

जिला के सभी किसानों को खरीफ फसलो बचाने को लेकर कृषि विभाग ने विशेष एडवाइजरी जारी की है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी राजीव कुमार ने बताया की इस समय मौसम में उतार-चाढाव चल रहा हैं। यानी बारिश और तापमान में उतार-चढ़ाव की वजह से फसलों में कीट और रोगों के फैलने की संभावना बढ़ गई है। जिले में खरीफ मौसम की प्रमुख फसलें धान, मक्का, मूंगफली, उर्द, मूंग, अरहर, गन्ना और कद्दू वर्गीय सब्जियां हैं। इन सभी फसलों में अलग-अलग कीट और रोग लगते हैं, जिनसे बचाव के लिए किसानों को समय रहते सावधानी और नियंत्रण उपाय करने जरूरी हैं। धान की फसल में खरपतवार, दीमक, खैरा रोग, तना छेदक और पत्ती लपेटक जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। इनके नियंत्रण के लिए उचित दवाओं का छिड़काव और ट्रैप का उपयोग करना चाहिए। मक्का में तना बेधक और फॉल आर्मी वर्म जैसे कीट ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं, जिनसे बचाव के लिए कीटनाशकों का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। मूंगफली व अरहर की फसल में पत्ती लपेटक और टिक्का रोग आम समस्या है। इन रोगों से प्रभावित पौधों को खेत से निकालकर नष्ट कर देना चाहिए, साथ ही जैविक दवाओं का छिड़काव भी करना चाहिए।
उर्द, मूंग और सोयाबीन की फसल में खरपतवार और पीला रोग ज्यादा नुकसान करते हैं। इसके लिए समय पर खरपतवार नियंत्रण, पीले रोग से ग्रस्त पौधों को नष्ट करने और सफेद मक्खी से बचाव के लिए दवाओं के छिड़काव तथा स्टिकी ट्रैप लगाने की सलाह दी गई है। गन्ने की फसल में पाइरिल्ला और टॉप बोरर जैसे कीट के साथ-साथ लाल सड़न रोग भी बड़ी समस्या बन सकते हैं। इससे बचाव के लिए प्राकृतिक शत्रु कीटों का संरक्षण, फेरोमोन ट्रैप और जरूरत पड़ने पर रासायनिक छिड़काव की सलाह दी गई है। कद्दू वर्गीय सब्जियों में फल मक्खी का प्रकोप ज्यादा देखने को मिलता है। इसके नियंत्रण के लिए प्रभावित फलों को नष्ट करने, फेरोमोन ट्रैप लगाने और जैविक दवाओं का उपयोग करने की सलाह दी गई है। इसके लिए अधिकारी ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी फसल की लगातार निगरानी करते रहें और किसी भी समस्या की जानकारी तुरंत कृषि विभाग को दें।

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