नई दिल्ली। गरीब बच्चों को नंगे पांव घूमते देख एक 10 साल की बच्ची का दिल पसीज गया। बच्ची का नाम मेहर सिक्का है, जो दिल्ली-एनसीआर की रहने वाली है। मेहर ने तय किया कि अब वह ऐसे बच्चों को जूते पहनाएगी जो गरीबी के कारण नंगे पांव रहते हैं। इसी सोच के साथ उसने एक अभियान शुरू किया, जिसका नाम है ‘काइंडसोल्स’ (Kindsoles) — मकसद है हर बच्चे के पैर में जूता पहुंचाना।
मेहर ने पहली बार मजदूरों के बच्चों को घर के आसपास नंगे पांव खेलते देखा था। इसके बाद उसने इस विषय पर रिसर्च की और जाना कि बिना जूते के रहने से बच्चों को कई गंभीर बीमारियों का खतरा होता है, जैसे त्वचा संक्रमण, चोट और रीढ़ से जुड़ी समस्याएं। तभी से उसने इस दिशा में काम शुरू कर दिया।
शुरुआत में मेहर ने अपने माता-पिता और दोस्तों की मदद से कुछ बच्चों को जूते दिए। फिर इस काम को बढ़ाने के लिए उसने ‘काइंडसोल्स’ नाम से अभियान शुरू किया। अब तक दिल्ली-एनसीआर, तेलंगाना और हैदराबाद के कई इलाकों में वह सैकड़ों बच्चों को जूते बांट चुकी है।
मेहर का कहना है कि जब किसी बच्चे को नया जूता मिलता है तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और वह स्कूल भी ज्यादा खुश होकर जाता है। उसका सपना है कि वह एक दिन पूरे भारत के बच्चों तक जूते पहुंचा सके।
मेहर की इस सोच और पहल की हर कोई सराहना कर रहा है। एक छोटी उम्र में इतनी बड़ी सोच ने यह साबित कर दिया कि बदलाव के लिए उम्र नहीं, बस जज्बा चाहिए।
