तेलुगु और तमिल फिल्मों की जानी-मानी अभिनेत्री निधि अग्रवाल के साथ हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान हुई बदतमीजी ने सोशल मीडिया पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस मामले में अभिनेता शिवाजी की एक टिप्पणी आग में घी डालने का काम कर गई, जिसके बाद वह ट्रोल्स के निशाने पर आ गए। न केवल फैंस बल्कि खुद निधि अग्रवाल ने भी शिवाजी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
दरअसल, एक इवेंट के दौरान निधि अग्रवाल के साथ कुछ लोगों द्वारा की गई बदतमीजी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एक्टर शिवाजी ने कथित तौर पर कहा कि अभिनेत्री को “इस तरह के कपड़े पहनने से बचना चाहिए था।” उनके इस बयान को कई लोगों ने विक्टिम ब्लेमिंग करार दिया। सोशल मीडिया यूजर्स ने शिवाजी पर जमकर निशाना साधा और कहा कि किसी महिला की ड्रेस को उसके साथ हुई बदतमीजी का कारण बताना गलत और असंवेदनशील है।
विवाद बढ़ने पर निधि अग्रवाल खुद सामने आईं और शिवाजी के बयान पर करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी महिला के पहनावे को उसके साथ हुए गलत व्यवहार से जोड़ना पितृसत्तात्मक सोच को दर्शाता है। निधि ने साफ कहा कि “सम्मान कपड़ों से नहीं, सोच से जुड़ा होता है।” उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे बयान समाज में गलत संदेश देते हैं और महिलाओं को ही दोषी ठहराने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देते हैं।
इस पूरे मामले के बाद फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई कलाकारों और महिला अधिकार संगठनों ने निधि अग्रवाल का समर्थन किया। सोशल मीडिया पर #StandWithNidhhi ट्रेंड करने लगा। कई यूजर्स ने कहा कि सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी है, न कि उनके कपड़ों पर सवाल उठाना। वहीं, शिवाजी के फैंस की ओर से सफाई देने की कोशिशें भी देखने को मिलीं, लेकिन आलोचना थमने का नाम नहीं ले रही।
फिलहाल यह विवाद एक बार फिर इस बहस को केंद्र में ले आया है कि महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान को लेकर समाज को अब भी लंबा सफर तय करना है। निधि अग्रवाल का बयान कई महिलाओं की आवाज बनकर सामने आया है, जिसने इस मुद्दे को और मजबूती दी है।
