काठमांडू से आ रही बड़ी खबर के मुताबिक, नेपाल इस समय भीषण राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ शुरू हुए युवा आंदोलनों ने पूरे देश में जोर पकड़ लिया है। खासकर Gen Z यानी 1997 के बाद जन्मी युवा पीढ़ी ने इस आंदोलन की कमान संभाली, जो अब सिर्फ इंटरनेट आज़ादी की नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सरकारी दमन के खिलाफ एक जनआंदोलन बन चुका है।
प्रदर्शन इतने तीव्र हो गए कि प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को आखिरकार इस्तीफा देना पड़ा। देश की राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में सरकारी भवनों पर हमला हुआ, संसद में आग लगा दी गई और मंत्रियों को सेना के हेलीकॉप्टरों से बचाकर बाहर निकाला गया। हिंसा में अब तक 19 लोगों की जान जा चुकी है, और दर्जनों घायल हैं। इसके बाद सेना को मोर्चा संभालना पड़ा, जिसने राजधानी में कर्फ्यू लगा दिया है और हालात पर नियंत्रण के प्रयास जारी हैं।
सरकार ने अब सोशल मीडिया से बैन हटा लिया है, लेकिन आंदोलन शांत होने का नाम नहीं ले रहा। हज़ारों युवा अभी भी सड़कों पर हैं, और सरकार से जवाब मांग रहे हैं। एयरपोर्ट को भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है, और काठमांडू आने वाली उड़ानों को लखनऊ और दिल्ली डायवर्ट किया गया है।
आज के दिन को निर्णायक माना जा रहा है, क्योंकि सेना और प्रशासन Gen Z आंदोलन के नेताओं से मुलाकात करने जा रहे हैं। यह बातचीत अगर सफल रही, तो देश में स्थिरता की उम्मीद बन सकती है। लेकिन अगर युवाओं की मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। पूरे दक्षिण एशिया की निगाहें इस वक्त नेपाल पर टिकी हैं — एक छोटे देश में उठी इस जनलहर ने पूरी सत्ता को झुका दिया है, अब देखना यह है कि आगे क्या होगा।
