नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 15 दिसंबर तक कमर्शियल फ्लाइट्स का ट्रायल पूरा हो जाएगा। अप्रैल 2025 से यात्री यहां से देश और विदेश के लिए उड़ान भर सकेंगे। एयरपोर्ट का रनवे और एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर तैयार हो चुका है।
खास बातें:
एयरपोर्ट पर कम दृश्यता में भी विमान आसानी से लैंड और टेकऑफ कर सकेंगे। यह एयरपोर्ट आधुनिक तकनीकों और भारतीय संस्कृति का संगम होगा।
डिजिटल यात्रा का अनुभव मिलेगा। यात्री क्यूआर कोड से चेक-इन और पेपरलेस यात्रा कर सकेंगे।
शून्य कार्बन उत्सर्जन के लिए सौर और वायु ऊर्जा का इस्तेमाल होगा।
उड़ान सेवाएं:
शुरुआत में 60 घरेलू उड़ानें और ज्यूरिख, सिंगापुर, दुबई के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होंगी।
लखनऊ, मुंबई, चेन्नई, वाराणसी जैसे शहरों के लिए घरेलू सेवाएं होंगी।
एयरपोर्ट की विशेषताएं:
62 सौ हेक्टेयर भूमि में से पहले चरण में 1334 हेक्टेयर पर दो रनवे बनाए जा रहे हैं।
पहले चरण की लागत लगभग 6000 करोड़ रुपये होगी।
सालाना 1.20 करोड़ यात्रियों की संख्या होने पर दूसरा रनवे शुरू किया जाएगा।
टर्मिनल भवन की डिजाइन भारतीय संस्कृति से प्रेरित है।
पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ:
एयरपोर्ट की 50% बिजली खपत सौर और वायु ऊर्जा से पूरी होगी।
परिसर में ई-वाहनों का संचालन होगा और उपयोग किए गए पानी को रिसाइकिल किया जाएगा।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अपनी तेज़ निर्माण प्रक्रिया और आधुनिक सुविधाओं के कारण भारत का सबसे तेजी से विकसित होने वाला एयरपोर्ट बनने जा रहा है।
