इस केस में नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में म्यांमार के 68 वर्षीय मरीज जॉआ की पहली रोबोटिक सहायता से किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। मरीज क्रोनिक किडनी डिजीज और मोटापे से पीड़ित थे और पिछले साल से डायलिसिस पर निर्भर थे। उनका पोषण स्तर काफी गिर चुका था और डायलिसिस के दौरान उन्हें गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।
सर्जरी के लिए मरीज की बहन ने किडनी डोनर के रूप में सहयोग दिया। मरीज की कमजोर स्थिति और पेट के मोटापे के कारण पारंपरिक सर्जरी के जोखिम ज्यादा थे, इसलिए रोबोटिक तकनीक का उपयोग किया गया।
रोबोटिक सर्जरी की खासियत:
1. सटीकता: 10x मैग्नीफिकेशन से नसों और धमनियों की पहचान और सटीक कट लगाना संभव हुआ।
2. छोटा चीरा: 5 सेमी का चीरा लगाया गया, जिससे दर्द और संक्रमण का खतरा कम हुआ।
3. कम जटिलताएं: मोटापे और कमजोर इम्यूनिटी के बावजूद, संक्रमण और हर्निया जैसी समस्याओं का खतरा कम हुआ।
4. तेजी से रिकवरी: पारंपरिक सर्जरी के मुकाबले मरीज जल्द ही स्वस्थ होकर सामान्य गतिविधियां करने लगे।
सर्जरी 5 घंटे चली और इसके बाद मरीज को आठ दिन में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों ने इसे एक सफल और जोखिम कम करने वाली तकनीक बताया, जो विशेष रूप से मोटापे और उम्रदराज मरीजों के लिए उपयोगी है।
यह तकनीक आधुनिक चिकित्सा क्षेत्र में एक नई उम्मीद के तौर पर उभरी है।
