बुधवार रात को किसान आंदोलन ने एक नया मोड़ लिया, जब पुलिस ने यमुना एक्सप्रेसवे के जीरो प्वाइंट पर धरना दे रहे 34 किसानों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस कार्रवाई से आंदोलन और तेज होने की संभावना है, क्योंकि गांव-गांव में किसान अब बैठकें कर रहे हैं और आंदोलन की रणनीति पर विचार कर रहे हैं। जैसे ही किसान नेताओं का संदेश मिलेगा, किसान फिर से एकत्र होकर आंदोलन को आक्रामक रूप में बदलने का इरादा रखते हैं।
किसानों की प्रमुख मांगें
किसान संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में 10 किसान संगठन 25 नवंबर से महापड़ाव पर बैठे हैं। उनकी प्रमुख मांगें हैं—दस प्रतिशत आबादी को भूखंड देना, भूमि अधिग्रहण कानून में सभी लाभ देना और हाई पावर कमेटी की सिफारिशों को लागू करना। किसानों ने 2 दिसंबर को दिल्ली कूच का प्रयास किया था, लेकिन पुलिस ने उन्हें महामाया फ्लाईओवर के पास रोक लिया था। इसके बाद किसानों ने दलित प्रेरणा स्थल पर महापड़ाव किया, जहां मंगलवार को पुलिस ने 123 किसानों को गिरफ्तार कर लिया था।
पुलिस कार्रवाई और आगे की स्थिति
पुलिस की कार्रवाई के बाद किसानों ने जीरो प्वाइंट पर महापंचायत की और शाम को अधिकारियों ने उनकी प्रमुख मांगों पर आश्वासन दिया। इसके बाद किसानों ने रातभर धरने पर बैठने का फैसला किया। इस पर देर रात पुलिस ने फिर से कार्रवाई की और 34 किसानों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस की सतर्कता
किसान आंदोलन के कारण पुलिस ने छह दिसंबर को बाबा साहेब आंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस को लेकर भी सतर्कता बढ़ा दी है। इस दिन विभिन्न संगठन बाबा साहेब के प्रति कृतज्ञता जाहिर करते हुए धरने प्रदर्शन कर सकते हैं, जिसे लेकर पुलिस पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है।
