पूर्वांचल रॉयल सिटी सेंटर सोसायटी में पितृपक्ष के अवसर पर 8 सितंबर से श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव की शुरुआत हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ भक्तों ने कलशयात्रा और जयघोषों के साथ बड़े धूमधाम से किया। इसके बाद कथा वाचन की शुरुआत हुई, जिसे कथावाचक आचार्य नरेश जी ने किया।
कथावाचक ने अपने प्रवचन में बताया कि कलयुग में श्रीमद्भागवत कथा जीवन की सबसे बड़ी औषधि है। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति श्रद्धा और आस्था से इस कथा का श्रवण करता है, उसके सभी विकार और दुख दूर हो जाते हैं। कथा का महत्व समझाते हुए उन्होंने कहा कि देवता भी इस कथा को सुनने के लिए तरसते हैं, लेकिन इसका सौभाग्य केवल मनुष्य को मिलता है।
कथा के दौरान कथावाचक ने उदाहरण दिया कि प्रेत धुंधकारी ने भी कथा के प्रभाव से मरणोपरांत देवत्व प्राप्त किया। उन्होंने समझाया कि यह कथा केवल जीवन की दशा ही नहीं बल्कि दिशा भी बदल देती है।
भजनों और प्रवचनों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु भावविभोर होकर कथा का श्रवण करते रहे और भक्ति रस में डूबे रहे। इस अवसर पर कथा संयोजक मृणाल, मनोज गुप्ता, प्रिंसपाल सिंह और राहुल शर्मा मौजूद रहे।
कार्यक्रम में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और इसे जीवन को संवारने वाला पावन अवसर बताया। आयोजन समिति ने बताया कि यह कथा महोत्सव पूरे सप्ताह तक चलेगा, जिसमें प्रतिदिन कथावाचक आचार्य नरेश जी भक्तों को धर्म, भक्ति और जीवन से जुड़े संदेश देंगे।
