पॉक्सो एक्ट के दोषी को 10 साल का कठोर कारावास

विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) विकास नागर की अदालत ने पॉक्सो एक्ट के दोषी सहरसा बिहार निवासी फारुख को दोषी करार देकर 10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पर 70 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना जमा नहीं करने पर सात माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
एडीजीसी क्राइम जय प्रकाश भाटी ने बताया कि मामला सेक्टर-20 कोतवाली नोएडा से संबंधित है। पीड़िता के पिता ने अपनी तहरीर में बताया था कि उनकी 16 वर्षीय पुत्री कक्षा 10वीं की छात्रा थी। 29 फरवरी 2016 को तड़के उसका अपहरण कर लिया गया था। उनके घर से लगभग एक लाख रुपये के गहने और 50 हजार रुपये नकद भी चुरा लिए थे। मामले में जांच अधिकारी ने 13 जून 2016 को अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया था। फारुख ने दोषी न होने का दावा कर मुकदमे की मांग की। अभियोजन पक्ष ने कुल छह गवाह पेश किए। 21 नवंबर 2025 को अदालत ने फारुख को आईपीसी की धारा-366, 376 और पॉक्सो एक्ट की धारा-4 के तहत दोषी करार दिया था। अदालत ने सजा सुनते हुए कहा फारुख ने नाबालिग अपहरण कर जबरन शादी करने के लिए मजबूर कर उसे अलग-अलग जगहों पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। यह कृत्य अमानवीय और कानून के खिलाफ है। अदालत ने पॉक्सो एक्ट की धारा-4 के तहत 10 वर्ष की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माना नहीं भरने पर 6 महीने की सजा होगी। वहीं आईपीसी की धारा-366 के तहत के 2 वर्ष की सजा और 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माना नहीं भरने पर 1 महीने की अतिरिक्त सजा होगी। अदालत ने आदेश दिया कि दोनों अपराध एक ही क्रम में किए गए हैं, इसलिए दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। अदालत ने सीआरपीसी की धारा 357 के तहत आदेश दिया कि दोषी पर लगाए गए जुर्माने का 80 प्रतिशत हिस्सा पीड़िता को उसके पुनर्वास के खर्च के लिए दिया जाएगा।

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