प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 मार्च 2025 को नई दिल्ली में 10वें रायसीना डायलॉग का उद्घाटन किया। यह तीन दिवसीय सम्मेलन 19 मार्च तक चलेगा, जिसमें 125 देशों के 3,500 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
इस वर्ष के सम्मेलन की थीम ‘कालचक्र: पीपुल, प्लेस एंड प्लैनेट’ है, जो वैश्विक चुनौतियों और उनके समाधान पर केंद्रित है।
उद्घाटन सत्र में न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन मुख्य अतिथि थे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है और न्यूजीलैंड इस क्षेत्र में अपने हितों के लिए भारत जैसे साझेदारों की ओर देख रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा कि भारत विकास की नीति में विश्वास करता है, विस्तारवाद में नहीं। उन्होंने इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव से जुड़ने के लिए न्यूजीलैंड का स्वागत किया और दोनों देशों के बीच खेल, शिक्षा और सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर बल दिया।
सम्मेलन में अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गब्बार्ड, यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा सहित कई अन्य वरिष्ठ राजनयिक भी शामिल हो रहे हैं। यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही उथल-पुथल, खासकर रूस-यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर हो रहा है।
रायसीना डायलॉग की शुरुआत 2016 में हुई थी और यह सिंगापुर में होने वाले शांगरी-ला डायलॉग की तर्ज पर आयोजित किया जाता है। यह भारत में किसी थिंक टैंक द्वारा आयोजित की जाने वाली एकमात्र कॉन्फ्रेंस है, जो अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती है।
सम्मेलन के दौरान भारत और न्यूजीलैंड के बीच कई अहम समझौते हुए हैं, जिनमें आतंकवाद के खिलाफ कदम उठाने, निवेश को बढ़ावा देने, स्किल्ड वर्कर्स के आदान-प्रदान और न्यूजीलैंड की यूनिवर्सिटीज के भारत में कैंपस खोलने जैसे विषय शामिल हैं।
प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री लक्सन ने गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब में भी दर्शन किए, जो दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने का संकेत है।
