बांग्लादेशी हिंदुओं की दुर्दशा पर योगी के बाद मायावती भी मुखर, विपक्ष घिरा

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा और उत्पीड़न को लेकर भारत की राजनीति में बहस तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त बयान के बाद अब बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती भी इस मुद्दे पर खुलकर सामने आ गई हैं। मायावती ने बांग्लादेश में हिंदुओं की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जताते हुए इसे गंभीर मानवीय और मानवाधिकार का विषय बताया है। उनके बयान के बाद विपक्षी दलों पर चुप्पी साधने के आरोप तेज हो गए हैं।

मायावती ने कहा कि बांग्लादेश में लगातार हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है, उनके घर जलाए जा रहे हैं, मंदिरों में तोड़फोड़ हो रही है और जान-माल का भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि भारत को इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से आवाज उठानी चाहिए। मायावती का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में अल्पसंख्यकों के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में बांग्लादेशी हिंदुओं के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाते हुए विपक्ष पर निशाना साधा था। योगी ने कहा था कि जो लोग भारत में अल्पसंख्यकों की बात करते हैं, वे बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर चुप क्यों हैं। योगी के बयान के बाद यह मुद्दा सियासी बहस का केंद्र बन गया और अब मायावती के समर्थन से विपक्ष और ज्यादा दबाव में नजर आ रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती का यह रुख इसलिए भी अहम है क्योंकि BSP अब तक ऐसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सीमित प्रतिक्रिया देती रही है। उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति केवल सत्तारूढ़ दल ही नहीं, बल्कि विपक्ष के कुछ बड़े नेताओं के लिए भी चिंता का विषय बन चुकी है। वहीं विपक्षी दलों पर आरोप लग रहे हैं कि वे वोट बैंक की राजनीति के चलते इस संवेदनशील मुद्दे से दूरी बनाए हुए हैं।

कुल मिलाकर, बांग्लादेशी हिंदुओं की दुर्दशा का मुद्दा अब भारत की घरेलू राजनीति में भी गंभीर बहस का कारण बन चुका है। आने वाले दिनों में इस पर और सियासी बयानबाजी और कूटनीतिक दबाव देखने को मिल सकता है।

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