बिहार में केवल आईएएस-आईपीएस की चर्चा नहीं होती, बल्कि पेपर लीक के मामलों ने भी राज्य को सुर्खियों में ला दिया है। परीक्षाओं में धांधली का आलम यह है कि प्रश्न पत्र परीक्षा हॉल में पहुंचने से पहले ही कुछ “जुगाड़ वाले” अभ्यर्थियों तक पहुंच जाता है। इसका खामियाजा लाखों मेहनतकश छात्रों को भुगतना पड़ता है।
हाल ही में बीपीएससी की 70वीं परीक्षा में पटना के एक सेंटर पर हंगामे के चलते पेपर रद्द कर दिया गया। पेपर लीक की घटनाएं बिहार में नई नहीं हैं। पिछले चार वर्षों में शायद ही कोई परीक्षा ऐसी हुई हो, जिसमें गड़बड़ी न हुई हो।
प्रमुख पेपर लीक घटनाएं:
1. 2024 (नीट): पेपर लीक में 67 लोग गिरफ्तार।
2. 2024 (बीपीएससी शिक्षक भर्ती): 285 आरोपी गिरफ्तार, 25 पर चार्जशीट।
3. 2023 (अमीन भर्ती परीक्षा): पेपर रद्द।
4. 2022 (बीपीएससी 67वीं पीटी): 21 आरोपी चार्जशीटेड।
5. 2021 (पुलिस भर्ती परीक्षा): मास्टरमाइंड राजेश कुमार गिरफ्तार।
पेपर लीक माफिया का नेटवर्क
जांच में पता चला कि ये माफिया प्रश्न पत्र की छपाई से लेकर ट्रांसपोर्ट तक की जानकारी रखते हैं। इनका नेटवर्क बिहार, झारखंड, यूपी, गुजरात, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में फैला हुआ है।
सरकार की कार्रवाई
आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लों ने बताया कि 2012 से अब तक 10 बड़े मामलों में 545 आरोपी गिरफ्तार हुए हैं, जिनमें से 249 पर चार्जशीट दायर हुई है। बावजूद इसके, ये रैकेट लगातार सक्रिय हैं।
