भारत द्वारा सिंधु जल संधि स्थगित करने के बाद पाकिस्तान में जल संकट गहराया, खरीफ फसलें संकट में

भारत ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया है। इस निर्णय के तहत भारत ने पाकिस्तान के साथ जल प्रवाह के आंकड़े साझा करना भी बंद कर दिया है, जिससे पाकिस्तान की जल प्रबंधन प्रणाली और आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली प्रभावित हुई है ।

पाकिस्तान में जल संकट और कृषि पर प्रभाव

भारत द्वारा चिनाब नदी के जल प्रवाह को नियंत्रित करने के कारण, पाकिस्तान के पंजाब और सिंध प्रांतों में सिंचाई के लिए आवश्यक पानी की भारी कमी हो गई है। मंगला और तरबेला जैसे प्रमुख बांधों में जल स्तर 50% से भी कम हो गया है, जिससे खरीफ फसलों की बुआई संकट में पड़ गई है ।

पाकिस्तान के सिंधु नदी प्रणाली प्राधिकरण (IRSA) के अनुसार, 2 जून 2025 को पंजाब प्रांत में पानी की उपलब्धता पिछले वर्ष की तुलना में 10.3% कम हो गई है, जिससे सिंचाई और जल विद्युत उत्पादन दोनों प्रभावित हो रहे हैं ।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय प्रयास

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस जल संकट को “गंभीर” बताया है और भारत से मदद की गुहार लगाई है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि लाखों पाकिस्तानी नागरिक पानी के अभाव में मर सकते हैं। हालांकि, भारत ने स्पष्ट किया है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक कोई सहयोग संभव नहीं है ।

भविष्य की चुनौतियाँ

संयुक्त राष्ट्र के एक हालिया अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि हिन्दू कुश हिमालय क्षेत्र के 75% ग्लेशियर भविष्य में पिघल सकते हैं, जिससे भारत और पाकिस्तान में करोड़ों लोगों के लिए गंभीर जल संकट उत्पन्न हो सकता है ।

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