हाल ही में चीन ने दावा किया कि उसने भारत और पाकिस्तान के बीच 2025 में हुई झड़प (Operation Sindoor) के समय सीजफायर में मध्यस्थता की भूमिका निभाई। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि बीजिंग ने कई अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने में मदद की है और इसमें भारत‑पाक तनाव भी शामिल है। उन्होंने बताया कि चीन ने दोनों देशों के बीच बातचीत में अहम योगदान दिया।
लेकिन भारत ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। नई दिल्ली ने कहा कि भारत‑पाकिस्तान के बीच किसी भी बातचीत में तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी। सीजफायर सीधे दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच तय हुआ था और इसमें किसी बाहरी देश की मदद की जरूरत नहीं थी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह भारत की पुरानी नीति है कि ऐसे मामलों में सिर्फ द्विपक्षीय (दो देशों के बीच) बातचीत ही होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने चीन की इस “हवाई बातें” को रोक दिया है और उसे समझा दिया कि भारत‑पाक संबंधों में किसी भी तरह का मध्यस्थता दावा वास्तविकता से बाहर है। इस बार भारत ने अपने रुख को बहुत स्पष्ट किया और चीन के दावे को नजरअंदाज कर दिया। इससे यह साफ़ हो गया कि भारत‑पाक विवादों में कोई तीसरा पक्ष शामिल नहीं होगा।
भारत ने चीन के दावे को खारिज किया, कहा- भारत‑पाक विवाद में कोई तीसरा पक्ष नहीं
