भारत-रूस-चीन की नजदीकी से बदल सकता है वर्ल्ड ऑर्डर, अमेरिका पर बढ़ेगी चिंता

नई दिल्ली। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में भारत, रूस और चीन की नजदीकी एक बार फिर चर्चा में है। सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत करते हुए कहा कि अब दुनिया को केवल एक देश के इशारे पर नहीं चलना चाहिए। उन्होंने नए विकास बैंक, ऊर्जा सहयोग और बीदौ सैटेलाइट सिस्टम जैसे प्रोजेक्ट्स का ऐलान भी किया। वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे “सच्चे बहुपक्षवाद” का उदाहरण बताते हुए एशिया के लिए नया सुरक्षा मॉडल बनाने की बात कही।

भारत ने भी इस मंच पर संतुलित भूमिका निभाई। पूर्व राजदूत मीरा शंकर ने कहा कि भारत इस गठजोड़ का हिस्सा है, लेकिन यह अमेरिका के खिलाफ नहीं है। भारत का मकसद है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन हो और सभी देशों के साथ संबंध बने रहें। उन्होंने माना कि अमेरिका अभी भी भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक बाज़ार है, इसलिए संतुलन बनाए रखना ज़रूरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-रूस-चीन (RIC) की संयुक्त ताकत विश्व व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है। इन तीनों देशों की कुल आबादी करीब 3.1 अरब है, जो दुनिया की 38% जनसंख्या है। साथ ही इनकी अर्थव्यवस्था और निर्यात क्षमता अमेरिका और पश्चिमी देशों के मुकाबले बड़ा असर डाल सकती है।

हालांकि, इस गठजोड़ की राह आसान नहीं है। भारत-चीन सीमा विवाद और आपसी अविश्वास बड़ी रुकावट बने हुए हैं। ऐसे में यह साझेदारी मजबूरी की दोस्ती ज़्यादा लगती है, न कि गहरे रणनीतिक गठबंधन की तरह। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भरोसा और तालमेल बना, तो यह गठजोड़ वैश्विक राजनीति को नई दिशा दे सकता है, वरना यह प्रयास अधूरा रह जाएगा।

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