भूटान की खुशहाली की नीति और माइंडफ़ुलनेस सिटी: भविष्य की दिशा

भूटान के तत्कालीन नरेश का निर्णय और देश का संविधान काफी विशिष्ट था। उस संविधान में यह स्पष्ट किया गया कि सरकार देश की संप्रभुता की रक्षा करेगी और लोगों की खुशहाली सुनिश्चित करेगी। खासतौर पर, ‘ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस’ (GNH) का विचार जो भूटान की नीति का आधार बना, यह समाज में खुशहाली को बढ़ावा देने के लिए था।

 

भूटान ने 2008 में लोकतंत्र को अपनाया, लेकिन इसके पहले ही नरेश ने राजगद्दी छोड़ दी थी। इसके बाद भूटान में ‘ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस’ के चार स्तंभों पर जोर दिया गया: प्रकृति का संरक्षण, संस्कृति का संरक्षण, न्यायसंगत आर्थिक विकास और अच्छे प्रशासन।

 

आर्थिक रूप से, भूटान का अधिकतर आय स्रोत कोयला, तांबा, खनिज, और हाइड्रोइलेक्ट्रिसिटी है, जो मुख्यतः भारत को निर्यात किया जाता है। भूटान का पर्यटन भी एक बड़ा उद्योग है, लेकिन इसके लिए देश ने पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिए नीति बनाई है। विदेशी पर्यटकों से एक शुल्क लिया जाता है, जिससे मुफ्त शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाती हैं। हालांकि, बेरोज़गारी और युवा पलायन जैसे मुद्दे भूटान के सामने हैं।

 

भूटान ने एक नया शहर बनाने की योजना बनाई है, जिसे माइंडफ़ुलनेस सिटी कहा गया है। यह शहर भूटान के दक्षिण मध्य क्षेत्र में स्थित होगा और इसमें पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियां भी होंगी। इसका उद्देश्य न केवल बेरोज़गारी और पलायन की समस्या को हल करना है, बल्कि भूटान की सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहर को भी संरक्षित रखना है।

 

यह परियोजना स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न करेगी और विदेशों में बसे भूटानी नागरिकों को भी वापस लाने का प्रयास करेगी। इसके सफलता की संभावना के बारे में डॉक्टर लव्हांग यूग्येल का कहना है कि यह एक नीतिगत प्रयोग है, और अगर यह सफल हुआ तो इसे पूरे देश में लागू किया जा सकता है।

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