दिल्ली का मजनू का टीला एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थल है, जो अपनी तिब्बती मार्केट और गुरुद्वारे के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन इसके भीतर एक अनजानी कहानी छिपी है—पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों की। ये वे लोग हैं जो 2011 में पाकिस्तान से भारत आए और अब यहां बसेरा बना लिया है।
यहां रहने वाले अधिकांश शरणार्थियों को अब भारतीय नागरिकता मिल चुकी है। यह समुदाय पहली बार भारत के किसी चुनाव में भाग लेने जा रहा है। दिल्ली चुनाव में ये लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। कुछ के वोटिंग कार्ड बन चुके हैं, जबकि बाकी प्रक्रिया में हैं।
इन शरणार्थियों नहीं बताया कि इनका मुख्य फोकस सुरक्षा, रोजगार, और शिक्षा पर है। वर्षों तक अपने देश में भेदभाव और कठिनाइयों का सामना करने के बाद, भारत में ये एक बेहतर भविष्य की उम्मीद कर रहे हैं।
