मणिपुर में हालात ऐसे बन गए कि मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह को इस्तीफा देना पड़ा, लेकिन उनके जाने के बाद भी नया मुख्यमंत्री तय नहीं हो सका। बीजेपी विधायक दल किसी एक नाम पर सहमत नहीं हो पाया, जिससे राज्य में नेतृत्व संकट खड़ा हो गया। इसी कारण, राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया।
राज्य में पहले से ही हालात तनावपूर्ण थे। मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हिंसा जारी है, जिसमें 250 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद चर्चा थी कि बीजेपी के कुछ विधायक कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन कर सकते हैं, जिससे सरकार और संकट में आ जाती। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने राज्यपाल से मुलाकात की, लेकिन कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकला।
जब किसी राज्य में सरकार ठीक से काम नहीं कर पाती या नेतृत्व संकट आ जाता है, तो संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लागू किया जाता है। इसका मतलब है कि राज्य का प्रशासन अब सीधे केंद्र सरकार के नियंत्रण में आ गया है, और राज्यपाल इसकी जिम्मेदारी संभालते हैं। विधानसभा या तो भंग कर दी जाती है या निलंबित रखी जाती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि राज्य में संवैधानिक व्यवस्था बनी रहे।
