मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को विधानसभा में एक नाविक परिवार की उल्लेखनीय सफलता की कहानी साझा की, जिसने महाकुंभ के दौरान 45 दिनों में 30 करोड़ रुपये की कमाई की। हालांकि, उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन गुरुवार को प्रयागराज के अरैल क्षेत्र का महरा परिवार चर्चा में आ गया।
130 नावों से हुई ऐतिहासिक कमाई
पिंटू महरा और उनका परिवार नाव संचालन का पारंपरिक व्यवसाय करता है। उनके परिवार में कुल 100 सदस्य हैं और उनके पास 130 नावें हैं। परिवार के अनुसार, मुख्यमंत्री द्वारा बताई गई कमाई सही है, लेकिन यह पूरी राशि पूरे परिवार में बंट गई है।
पिंटू महरा ने बताया कि 2019 के कुंभ में भी उन्होंने नाव चलाई थी, जिससे उन्हें अंदाजा हो गया था कि इस बार श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होगी। इसे देखते हुए उन्होंने महाकुंभ से पहले 70 नई नावें खरीदीं, जिससे उनकी नावों की कुल संख्या 130 हो गई। परिवार की महिलाओं ने नावें खरीदने के लिए अपने गहने तक बेच दिए।
बेहतर प्रबंधन से श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि
पिंटू महरा और उनकी मां शुकलावती देवी का कहना है कि इस बार कुंभ में प्रशासन के अच्छे इंतजामों के कारण श्रद्धालुओं की संख्या ज्यादा रही, जिससे न केवल उनके परिवार बल्कि सभी नाविकों की कमाई बढ़ी।
वीआईपी घाट पर ज्यादा मुनाफा
संगम पर दो मुख्य घाट—अरैल और किला वीआईपी घाट—हैं। पिंटू महरा की नावें अरैल वाले घाट पर संचालित हो रही थीं, जहां वीआईपी मेहमान अधिक पहुंचे। इससे उनकी कमाई और अधिक हो गई।
वहीं, किला वीआईपी घाट के नाविकों ने भी इस महाकुंभ में अच्छी कमाई की। नाविक राकेश निषाद ने बताया कि एक दक्षिण भारतीय परिवार ने उन्हें संगम स्नान कराने के बाद पारिश्रमिक पूछा। जब उन्होंने एक उंगली दिखाई, तो परिवार ने एक लाख रुपये से अधिक की राशि दी, जो गिनने पर 1.6 लाख रुपये निकली।
नाविकों और श्रमिकों को भी मिला लाभ
महाकुंभ में सिर्फ नाव मालिकों को ही नहीं, बल्कि नाव चलाने वाले श्रमिकों को भी अच्छा मुनाफा हुआ। सामान्य दिनों में 50-100 रुपये प्रति फेरा कमाने वाले मजदूरों को इस दौरान एक फेरे का 500 रुपये तक मिला। दिन में 10 फेरे लगाने वाले श्रमिकों ने प्रतिदिन 4,000-5,000 रुपये तक कमाए।
महाकुंभ के लिए 1400 नावों को मिला लाइसेंस
प्रशासन ने 14 घाटों पर नाव संचालन की अनुमति दी थी, जिसके लिए कुल 1400 नावों को लाइसेंस जारी किए गए थे। नावों की मजबूती की जांच करने के बाद ही उन्हें संचालन की अनुमति दी गई थी।
भविष्य की योजना
महरा परिवार अब इस व्यवसाय को और संगठित करने और अपनी नावों की संख्या बढ़ाने की योजना बना रहा है। महाकुंभ की इस सफलता ने उनके जीवन में आर्थिक समृद्धि लाई है, जिसे वे गंगा मइया की कृपा मानते हैं।
