उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विपक्षी नेताओं अखिलेश यादव व मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच महाकुंभ में हुई मौतों को लेकर तीखी राजनीतिक बहस छिड़ गई है।
क्या है विवाद?
प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान भगदड़ की खबरें आईं, जिसमें कई लोगों की मौत हुई और कुछ लोग लापता हो गए। इस मुद्दे को विपक्ष ने संसद में उठाया। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने लोकसभा में सरकार से मौतों के सही आंकड़े देने और राहत कार्यों पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने की मांग की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी राज्यसभा में इस पर सवाल उठाया और सरकार से जवाब मांगा।
योगी आदित्यनाथ का पलटवार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के इन सवालों को सनातन धर्म विरोधी साजिश बताया। उनका कहना है कि कुछ लोग जानबूझकर कुंभ जैसे धार्मिक आयोजन को बदनाम करने में लगे हैं। उन्होंने अखिलेश यादव और खड़गे पर निशाना साधते हुए कहा कि ये वही लोग हैं, जो राम जन्मभूमि आंदोलन का विरोध करते रहे और अब सनातन संस्कृति को निशाना बना रहे हैं।
विपक्ष की मांग और सवाल
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार बजट के आंकड़े दे सकती है तो महाकुंभ में हुई मौतों का सही आंकड़ा क्यों नहीं दे सकती?
उन्होंने घटना की जांच के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने और प्रबंधन की जिम्मेदारी सेना को देने का सुझाव दिया।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि भगदड़ में हजारों लोगों की जान गई। जब सभापति ने बयान वापस लेने को कहा, तो खड़गे बोले कि यह उनका अनुमान है, अगर सरकार के पास सही आंकड़ा है तो उसे बताना चाहिए।
सवाल उठते हैं तो जवाब क्यों नहीं?
सरकार ने अभी तक 30 मौतों की पुष्टि की है, लेकिन विपक्ष और कई पीड़ित परिवारों का दावा है कि यह आंकड़ा ज्यादा हो सकता है। कई परिवार अब भी अपने लापता परिजनों को ढूंढ रहे हैं।
मध्य प्रदेश के सागर निवासी अशोक पटेल अपने पिता की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। न अस्पतालों में, न पोस्टमार्टम हाउस में और न ही लावारिस शवों में उनका कोई पता चल रहा है। ऐसे कई लोग हैं जिनका हादसे के बाद कोई सुराग नहीं मिला।
