महाराष्ट्र की सत्ताधारी महायुति (BJP-शिवसेना शिंदे गुट-NCP) में तनाव के संकेत फिर सामने आए हैं, जब डिप्टी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात की। यह कदम राजनीतिक गलियारों में चर्चा का कारण बन गया है, क्योंकि माना जा रहा है कि यह सिर्फ “औपचारिक भेट” नहीं, बल्कि अधिक गहरे असंतोष का इजहार था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिंदे ने शाह से राज्य में विकास परियोजनाओं और फंड आवंटन में देरी की चिंता जाहिर की है। खासकर शिव सेना के मंत्रालयों से जुड़े फाइलों में अटका-पटका काम और बजट में कटौती को उन्होंने उठाया है।
उनका आरोप है कि गठबंधन में उनकी पार्टी “एलियनटेड” महसूस कर रही है।
इस मुलाकात के बाद, शिंदे ने महायुति के भीतर “पार्टियों के बीच नेता-भरोसे और एकता बनाए रखने” की अपील की है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की “लीडर पोटचिंग” (नेताओं को एक दल से दूसरे दल में लेने का प्रवृत्ति) को महायुति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बीजेपी ने भी स्थिति को शांत करने की कोशिश की है। उनकी ओर से कहा गया है कि यह बैठक सिर्फ “विकास एजेंडा” पर आधारित थी और इसमें कोई दरार नहीं है।
शिंदे ने भी बयान दिया है कि उनकी मुलाकात शाह से महज “संवाद और फंडिंग को लेकर” रही है, और उन्होंने इन अटकलों का खंडन किया कि महायुति में सब ठीक नहीं है।
हालाँकि, विश्लेषकों का कहना है कि यह मुलाकात गहरे असंतोष का संकेत हो सकती है।
शिंदे ने बजट आवंटन, मंत्रालयों की आज़ादी और गठबंधन की आंतरिक शक्तियों पर सवाल उठाए हैं, जिससे महायुति की एकता पर विश्वास करने वालों के लिए चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं।
