महाराष्ट्र की ‘लाडकी बहिन योजना’ विवादों में क्यों? जानिए पूरा मामला संक्षेप में

योजना क्या है?

लाडकी बहिन योजना महाराष्ट्र सरकार की ओर से शुरू की गई एक आर्थिक सहायता योजना है, जिसका उद्देश्य राज्य की 21 से 60 वर्ष की आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को हर महीने ₹1500 की सहायता देना था।
यह योजना अक्टूबर 2024 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले शुरू की गई थी।

अब क्या हुआ है? – विवाद की जड़

योजना अब विवादों के घेरे में है क्योंकि:

  • अब तक 9 लाख महिलाओं के नाम योजना से काट दिए गए हैं।

  • 41 लाख और महिलाएं स्क्रूटनी (जांच) की कतार में हैं।

  • वर्तमान में लगभग 2.37 करोड़ महिलाएं योजना में बनी हुई हैं, जबकि दिसंबर 2024 में यह संख्या 2.46 करोड़ थी।

क्यों काटे गए नाम? – मुख्य कारण

  1. अन्य योजनाओं से लाभ लेना – जैसे:

    • संजय गांधी निराधार योजना (2 लाख महिलाएं)

    • नमो किसान योजना (7.7 लाख महिलाएं)

  2. सरकारी नौकरी में महिलाएं – 2600 की पहचान हुई है, लेकिन संख्या 50,000 तक पहुंच सकती है

  3. पारिवारिक आय सीमा से अधिक (₹2.5 लाख/वर्ष से ऊपर) – करीब 25 लाख महिलाएं जांच के दायरे में हैं।

  4. अन्य तकनीकी कारण – जैसे गलत जानकारी, दस्तावेजों की त्रुटियां आदि।

विपक्ष का आरोप क्या है?

  • शिवसेना (UBT): “यह चुनावी स्टंट और घोटाला है। फर्जी नामों से पंजीकरण कराया गया।”

  • कांग्रेस: “जिसके लिए योजना थी, उन्हें ही पैसा नहीं मिल रहा।”

  • NCP (शरद पवार गुट): “पहले स्क्रूटनी होनी चाहिए थी, अब जनता से वसूली की नौबत है।”

सरकार का पक्ष

  • अजित पवार (वित्त मंत्री): “जल्दबाज़ी में योजना लागू हुई, अब पात्रता की जांच जरूरी है।”

  • गिरीश महाजन (कैबिनेट मंत्री): “सरकारी कर्मचारी ने योजना का लाभ लिया है तो पैसे लौटाएं।”

  • अदिति तटकरे (महिला एवं बाल कल्याण मंत्री): “महिलाओं के लिए योजना है, बदनाम करने की साजिश हो रही है।”

अब तक का लाभ और फंड स्थिति

  • करीब 1.05 करोड़ महिलाओं को कम से कम एक किश्त मिल चुकी है।

  • योजना का कुल बजट ₹46,000 करोड़ था।

  • फंड की कमी के कारण 8 लाख महिलाओं को ₹1500 की बजाय ₹500 मिल रहे हैं।

सरकार के सामने चुनौतियां

  • पारदर्शिता और भरोसा दोबारा कायम करना।

  • विपक्ष के आरोपों से निपटना।

  • आर्थिक संसाधनों की कमी से योजना का संतुलन बनाए रखना।

  • यह देखना होगा कि यह योजना विधानसभा चुनाव 2029 में सरकार के लिए वरदान बनेगी या अभिशाप

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