महाराष्ट्र में आज शाम पांच बजे भारतीय जनता पार्टी के नेता देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। लंबे सस्पेंस के बाद एकनाथ शिंदे ने महायुति सरकार में शामिल होने का फैसला किया है और वे उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। बताया जा रहा है कि पहले वे नाराज़ थे क्योंकि बीजेपी ने उन्हें गृह मंत्रालय और विधानसभा अध्यक्ष का पद नहीं दिया। हालांकि, देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को उनसे मुलाकात कर उन्हें मना लिया।
शिंदे के उपमुख्यमंत्री बनने के तीन अहम कारण
1. पार्टी में एकता बनाए रखने की कोशिश
शिंदे अगर किसी और को उपमुख्यमंत्री बनाते, तो पार्टी में आंतरिक विवाद हो सकता था। उनके बेटे श्रीकांत शिंदे इस पद के प्रमुख दावेदार थे, लेकिन ऐसा करने पर उन पर परिवारवाद का आरोप लग सकता था। वहीं, किसी अन्य नेता को यह पद देने से पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन बिगड़ने का खतरा था।
2. नेतृत्व की स्थिरता बनाए रखना
शिंदे की बगावत और मुख्यमंत्री कार्यकाल ने उन्हें शिवसेना में मजबूत नेता बना दिया। अगर उपमुख्यमंत्री के रूप में किसी और को चुना जाता, तो पार्टी में नया शक्ति केंद्र उभर सकता था, जिससे शिंदे की स्थिति कमजोर हो सकती थी।
3. बीजेपी-शिवसेना गठबंधन की मजबूती
शिंदे बीजेपी और शिवसेना के बीच संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने एनसीपी गुट के शामिल होने पर भी विरोध नहीं किया था। उनके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह से भी अच्छे संबंध हैं। यदि शिंदे सरकार में अहम भूमिका में नहीं रहते, तो गठबंधन में तालमेल बिगड़ सकता है, जिससे बीजेपी की स्थिति पर सवाल उठ सकते थे।
