भारत की आर्थिक कहानी में एक नया अध्याय जुड़ गया है। नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में एक ऐतिहासिक पल देखने को मिला, जहां एशियाई भारतीय चैंबर ऑफ कॉमर्स ने एक ऐसी पहल की शुरुआत की, जो लाखों छोटे उद्यमियों के सपनों को पंख लगाएगी। ‘भारत आपूर्तिकर्ता विविधता कार्यक्रम’ नाम का यह अभियान सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि भारत के एमएसएमई सेक्टर की तकदीर बदलने का एक माध्यम है।
कार्यक्रम में मौजूद कौशल विकास राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि यह पहल भारत के आर्थिक विकास में एक मील का पत्थर साबित होगी। उनके साथ राजकुमार सांगवान और मिथिलेश कुमार जैसे दिग्गज नेताओं की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम की महत्ता को और बढ़ा दिया।
क्या है इस प्रोग्राम की खास बात?
- छोटे उद्यमियों को मिलेगा वैश्विक कंपनियों से सीधा कनेक्शन
- महिला उद्यमियों और वंचित समुदायों के व्यवसायों को मिलेगी विशेष प्राथमिकता
- सैनोफी, जॉनसन एंड जॉनसन, माइक्रोन जैसी दिग्गज कंपनियां हैं शामिल
- विश्वस्तरीय प्रमाणन और तकनीकी सहायता का विशेष प्रावधान
कार्यक्रम के मुख्य स्तंभ: “हमारा डेटाबेस छोटे व्यवसायों को वैश्विक खरीदारों से जोड़ेगा,” AICC की अध्यक्ष कोमल डांगी ने बताया। उन्होंने आगे कहा कि यह प्लेटफॉर्म न केवल रजिस्ट्रेशन की सुविधा देगा, बल्कि व्यवसायों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने में भी मदद करेगा।
राखी अग्रवाल, जो सैनोफी में वैश्विक आपूर्तिकर्ता विविधता की प्रमुख हैं, ने एक महत्वपूर्ण बात कही, “यह सिर्फ एक प्रोग्राम नहीं है, यह भारतीय एमएसएमई के लिए वैश्विक बाजार का द्वार है।”
प्रोग्राम की विशेषताएं:
- विश्वस्तरीय प्रमाणन सिस्टम
- एक-एक करके मेंटरशिप
- सीधे बिजनेस मैचमेकिंग
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार मिशन
- निरंतर तकनीकी सहयोग
ISDP के अध्यक्ष राजीव कृष्ण के शब्दों में, “यह कार्यक्रम भारत के छोटे उद्यमियों को वैश्विक चैंपियन बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।”
भविष्य की राह: यह प्रोग्राम अब पंजीकरण के लिए खुला है। इसका लक्ष्य है भारत के एमएसएमई सेक्टर को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का अभिन्न हिस्सा बनाना। यह पहल न केवल व्यवसायों को बढ़ावा देगी, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
यह कार्यक्रम भारत के आर्थिक परिदृश्य में एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है, जहां छोटे उद्यमी वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना सकेंगे। यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लाखों सपनों को उड़ान देने का एक माध्यम है, जो भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
