रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान-इज़राइल के बीच जारी तनाव का सीधा असर अब वैश्विक हवाई यातायात (Global Air Traffic) पर भी दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को अब अपने रास्ते बदलने पड़ रहे हैं जिससे ना केवल उड़ान की दूरी बढ़ी है, बल्कि समय और ईंधन की लागत में भी भारी इजाफा हुआ है।
यूक्रेन और रूस के बीच चल रही लड़ाई के चलते अधिकांश एयरलाइंस रूसी हवाई क्षेत्र से बच रही हैं। इससे यूरोप और एशिया के बीच उड़ानें लंबी हो गई हैं। वहीं, हाल ही में ईरान और इज़राइल के बीच बढ़े तनाव ने मध्य-पूर्व के बड़े हिस्से को हवाई उड़ानों के लिए असुरक्षित बना दिया है।
सुरक्षा एजेंसियों ने इराक, सीरिया और यमन जैसे क्षेत्रों को “हाई रिस्क ज़ोन” घोषित किया है। GPS स्पूफ़िंग, ड्रोन हमले और मिसाइल खतरों के कारण एयरलाइंस इन क्षेत्रों के ऊपर से उड़ान भरने से बच रही हैं।
फ्लाइटरडार24 जैसे प्लेटफॉर्म पर देखा जा सकता है कि मध्य-पूर्व, रूस और युद्ध-प्रभावित क्षेत्रों के ऊपर हवाई ट्रैफिक बेहद कम है, जबकि अमेरिका, यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया में उड़ानों की संख्या सामान्य बनी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हवाई रूटों में बदलाव के कारण यात्रियों को टिकट के लिए ज्यादा भुगतान करना पड़ रहा है और कई उड़ानें कैंसल भी हो रही हैं। ट्रैवल एजेंटों का कहना है कि उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
