यूक्रेन पर मंडराता संकट: ट्रंप-पुतिन वार्ता से बंटवारे की आशंका

यूक्रेन लंबे समय से अपने रूसी कब्जे वाले क्षेत्रों को “अस्थायी रूप से अधिकृत क्षेत्र” कहता आया है, लेकिन अब उसकी उम्मीदें कमजोर होती दिख रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक ऐसे शांति प्रस्ताव की दिशा में बढ़ रहे हैं, जिससे यूक्रेन के विभाजन की आशंका बढ़ गई है। ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिया कि रूस के साथ होने वाली शांति वार्ता में यूक्रेन को अपने कब्जे वाले क्षेत्र वापस पाने की संभावना बहुत कम है।

ट्रंप-पुतिन वार्ता और बढ़ती चिंता

ट्रंप ने दुबई में प्रस्तावित शांति वार्ता में यूरोपीय देशों को शामिल करने से इनकार कर दिया है। बुधवार को उनकी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच करीब 90 मिनट तक टेलीफोन पर बातचीत हुई, जिससे यूक्रेन में गहरी चिंता फैल गई है।

यूक्रेन की विदेश नीति विशेषज्ञ यूलिया काजडोबिना का मानना है कि पुतिन वास्तव में शांति नहीं चाहते। वह कहती हैं कि रूस पहले भी यूक्रेन के साथ कई समझौते कर चुका है, लेकिन हर बार उनका उल्लंघन किया है। 1994 में किए गए समझौते में रूस ने यूक्रेन की संप्रभुता और अखंडता की गारंटी दी थी, लेकिन 2014 में क्रीमिया पर कब्जा कर लिया। इसके बाद 2022 में रूस ने यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण कर दिया।

यूक्रेन की सरकार की कड़ी प्रतिक्रिया

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी ऐसे शांति समझौते को स्वीकार नहीं करेंगे, जिसमें कीव को शामिल नहीं किया जाएगा। यूक्रेन को आशंका है कि ट्रंप, रूस के साथ वार्ता में उसे अलग-थलग कर सकते हैं, जिससे देश के विभाजन का खतरा पैदा हो सकता है।

रूसी कब्जे वाले क्षेत्रों में हालात

वर्तमान में रूस ने यूक्रेन के लगभग 20% हिस्से पर नियंत्रण कर रखा है। इनमें क्रीमिया, डोनेट्स्क और लुहांस्क जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। इन इलाकों में लगभग 60 लाख लोग रहते हैं, जिनमें 10 लाख बच्चे भी शामिल हैं। क्रीमिया में रूस का दमनकारी शासन लागू है, जहां विरोध की आवाजों को दबा दिया जाता है।

युद्धविराम या खतरे की शुरुआत?

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बार-बार यह संकेत दे चुके हैं कि वे डोनेट्स्क और लुहांस्क पर पूरी तरह से कब्जा चाहते हैं। यूक्रेनी सेना के अधिकारी वोलोडिमिर सब्लिन का मानना है कि अगर रूस को यूक्रेन के कुछ क्षेत्रों पर कब्जा करने दिया गया, तो यह अन्य देशों के लिए खतरनाक मिसाल बनेगी।

उनका कहना है कि अगर यूरोप और अमेरिका ने यूक्रेन की मदद नहीं की, तो कुछ सालों में बड़ा युद्ध हो सकता है। इससे रूस को यह भरोसा मिलेगा कि वह अन्य देशों पर भी आक्रमण कर सकता है और बिना किसी दंड के उनके क्षेत्रों पर कब्जा कर सकता है।

क्या यूक्रेन अकेला पड़ जाएगा?

ट्रंप की प्रस्तावित शांति वार्ता और यूरोपीय देशों को इससे दूर रखने के फैसले ने यूक्रेन के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अगर यह वार्ता यूक्रेन के खिलाफ जाती है, तो न केवल उसका भूगोल बदलेगा बल्कि वैश्विक राजनीति में भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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