बांग्लादेश में इस समय हालात को लेकर काफी चिंता जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सत्ता परिवर्तन के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार से लोगों को शांति और स्थिरता की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। आरोप है कि सरकार की सबसे बड़ी गलती यह रही कि उसने देश में बढ़ती कट्टरपंथी ताकतों पर समय रहते सख्ती नहीं की। इसका सबसे ज्यादा असर हिंदू अल्पसंख्यकों पर पड़ा। कई इलाकों से हिंदुओं पर हमले, घर-दुकानों को नुकसान, मंदिरों में तोड़फोड़ और हिंसा की खबरें सामने आईं। कहा जा रहा है कि सरकार ने इन घटनाओं को गंभीरता से लेने के बजाय कई बार “अफवाह” या “राजनीतिक साजिश” बताकर टाल दिया। इससे हमलावरों का हौसला बढ़ा और हिंदू समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस करने लगा। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भी यूनुस सरकार पर आरोप लगाया कि उनके शासन में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़े हैं। भारत समेत कई देशों और अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने भी बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है। कुल मिलाकर, आलोचकों का कहना है कि मोहम्मद यूनुस की यही बड़ी चूक आज बांग्लादेश के हिंदुओं के लिए संकट बन गई है और देश में सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा है।
यूनुस सरकार की चूक से बांग्लादेश में हिंदू असुरक्षित, बढ़ी हिंसा और डर का माहौल
