यूपी विधानसभा बजट सत्र का पहला दिन हंगामेदार, भाषा के मुद्दे पर भिड़े पक्ष-विपक्ष

यूपी विधानसभा के बजट सत्र का पहला दिन भारी हंगामे से भरा रहा। सुबह से ही विपक्षी सदस्य तख्तियां और नैतिकता का अस्थि कलश लेकर चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के सामने धरना देने पहुंचे। विधानसभा और विधान परिषद के संयुक्त सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्षी दलों ने लगातार नारेबाजी की, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हुई और सत्र को 12:30 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।

सत्र दोबारा शुरू होते ही भाषा को लेकर पक्ष और विपक्ष में तीखी बहस छिड़ गई। विधानसभा अध्यक्ष ने हिंदी के साथ-साथ अवधी, भोजपुरी, ब्रज, बुंदेलखंडी और अंग्रेजी के इस्तेमाल की जानकारी दी, जिस पर नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि बड़ी मुश्किल से विधानसभा से अंग्रेजी हटाई गई थी, और इसे फिर से शामिल करना हिंदी को कमजोर करने का प्रयास है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अगर अंग्रेजी को अनुमति दी जा रही है, तो उर्दू को भी शामिल किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि यूपी की स्थानीय बोलियों को सदन में सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार भोजपुरी, अवधी, ब्रज और बुंदेलखंडी के लिए अलग-अलग अकादमियां स्थापित करने की प्रक्रिया में है, क्योंकि ये हिंदी की उपभाषाएं हैं। उन्होंने विपक्ष पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाते हुए कहा कि वे अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पढ़ाते हैं, लेकिन आम जनता के बच्चों को उर्दू पढ़ाने की वकालत करते हैं।

इससे पहले, विधानसभा पहुंचने पर मुख्यमंत्री ने विपक्ष से सार्थक चर्चा की अपील की और बताया कि 20 फरवरी को यूपी का वार्षिक बजट पेश किया जाएगा। यह सत्र 18 फरवरी से 5 मार्च तक प्रस्तावित है, जो यूपी के इतिहास में सबसे लंबे सत्रों में से एक होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले आठ वर्षों में जो विकास कार्य किए हैं, वे ऐतिहासिक हैं, लेकिन हताश विपक्ष इन मुद्दों से बचने के लिए हंगामा कर रहा है। उन्होंने विपक्ष से सहयोग की उम्मीद जताई ताकि यह सत्र सफल हो सके।

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