उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का दूसरा दिन क्षेत्रीय भाषाओं के सम्मान और पहचान को समर्पित रहा। मंगलवार को जहां अंग्रेजी और उर्दू को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी, वहीं बुधवार को विधायकों को अपनी क्षेत्रीय भाषाओं—बुंदेलखंडी, भोजपुरी और अवधी—में बोलने का अवसर दिया गया।
बलिया की बांसडीह सीट से बीजेपी विधायक केतकी सिंह ने भोजपुरी में अपनी बात रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विधानसभा अध्यक्ष का आभार व्यक्त किया। उन्होंने भोजपुरी का विरोध करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि “कोई गले पर तलवार नहीं रखी है, जिसे हिंदी बोलनी है वो हिंदी बोले, जिसे भोजपुरी में बोलना है वो भोजपुरी बोले, और जिसे नहीं बोलना, वो चुपचाप घर चला जाए।” उनके इस बयान पर सदन में ठहाके गूंज उठे।
ऊंचाहार से सपा विधायक मनोज पांडेय ने अवधी भाषा में बोलते हुए क्षेत्रीय भाषाओं के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि उन्हें सैकड़ों फोन आए, जिनमें बुंदेलखंड और अवध क्षेत्र के लोगों ने पूछा कि उनकी भाषा का विरोध करने वाले कौन हैं और क्या वे उनका वोट नहीं लेना चाहते?
मथुरा से बीजेपी विधायक श्रीकांत शर्मा ने ब्रज भाषा में अपनी बात रखते हुए कहा कि इस फैसले से स्थानीय बोलियों को बढ़ावा मिलेगा और आने वाली पीढ़ी अपनी मातृभाषा से जुड़ पाएगी। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस प्रयास की सराहना की और कहा कि “वैसे तो तुमने बहुत अच्छे काम किए हैं, लेकिन यह काम बहुत जोरदार किया है।”
इस पूरे सत्र में क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर जोश और गर्व की भावना देखने को मिली, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आमतौर पर देखी जाने वाली तीखी बहसों की जगह ठहाकों और हास्य-व्यंग्य ने ले ली।
