25 जुलाई 2025 को सुबह मनोहरथाना ब्लॉक के पिपलोदी गाँव स्थित एक सरकारी उच्च प्राथमिक स्कूल में भयावह घटना घटी। लगभग 8:00 बजे, प्रार्थना सभा के दौरान अचानक स्कूल की छत और दीवार गिर गई, जिससे लगभग 35 बच्चे मलबे के नीचे दब गए। इसमें 7 बच्चों की मौत हो गई, जबकि लगभग 28–29 बच्चे घायल हुए हैं, जिनमें से कुछ की स्थिति गंभीर बताई गई है ।
स्थानीय पुलिस अधिकारी अमित कुमार के अनुसार, हादसा ठीक उस समय हुआ जब बच्चे व्यायाम सभा के लिए इकट्ठा हुए थे। सभी मृतक छात्र कक्षा 7–8 के थे, और घायल बच्चों को दो आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया था ।
पूर्व में स्कूल की हालत बिगड़ने की शिकायत कई बार गाँववालों द्वारा की गई थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। घटनाकारी भवन 1990–1991 में निर्मित बताया जा रहा है और जर्जर स्थिति में था ।
बलात्कारपूर्व चेतावनी के बावजूद, छात्रों ने मलबा गिरने की घटना की सूचना शिक्षकों को दी, लेकिन उन्हें “कुछ नहीं होगा” कहकर कक्षा में बैठे रहने की सलाह दी गई। बच्चे खिड़की में पत्थर गिरने की बात बता चुके थे, लेकिन प्राचार्य ने कुंडी लगा दी और बच्चों को अंदर बैठा दिया, जिससे वे बच नहीं पाए ।
घटना के तुरंत बाद, तत्कालीन ग्रामीण, विद्यालय कर्मचारी और बचाव टीमें मौके पर पहुँचीं। स्थानीय लोग, पुलिस और प्रशासन ने मिलकर जेसीबी मशीनों से मलबा हटाया और घायल बच्चों को अस्पताल भेजा ।
राज्य सरकार ने त्वरित कदम उठाए: शिक्षा विभाग ने पांच शिक्षकों को निलंबित कर दिया, जिन पर लापरवाही और आपराधिक दृष्टिकोण की जांच की जा रही है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद जताई गई है ।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस घटना पर गहरी शोक संवेदना जताई और घटना की उच्च स्तरीय जांच की घोषणा की है। उन्होंने घायल बच्चों के इलाज की व्यवस्था करने और संभावित ज़िम्मेदारों को दंडित करने की बात कही ।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस दुखद घटना पर खेद व्यक्त किया और परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया ।
राष्ट्रीय स्तर पर यह हादसा शिक्षा संस्थानों में संरचनात्मक सुरक्षा, नियमित निरीक्षण, मरम्मत और जवाबदेही की कमी पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। मौसमी बारिश के दौरान ऐसे पुराने भवनों की प्राणघातक स्थिति को स्पष्ट करता है और तत्काल सुधार की आवश्यकता पर जोर देता है ।
