दिल्ली हाईकोर्ट ने बाबा रामदेव के उस बयान को लेकर कड़ी टिप्पणी की है, जिसमें उन्होंने ‘शरबत जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल किया था। कोर्ट ने कहा कि यह बयान अक्षम्य (माफ करने लायक नहीं) और अविश्वसनीय (जिस पर भरोसा न हो) है।
यह मामला तब उठा जब बाबा रामदेव का एक वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि कुछ लोग मुस्लिमों के नाम पर लड़कियों को अपने साथ मिलाने के लिए “शरबत जिहाद” चला रहे हैं।
इस वीडियो पर आपत्ति जताई गई और मामला कोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने साफ कहा कि इस तरह के बयान समाज में नफरत फैलाते हैं और इससे सांप्रदायिक सौहार्द (धर्मों के बीच मेल-मिलाप) बिगड़ता है।
कोर्ट का आदेश: बाबा रामदेव और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को 5 दिन के अंदर वह वीडियो हटाने का निर्देश दिया गया है।
