कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को भाजपा की राजनीति का निम्न स्तर बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए शर्मनाक घटना बताया और कहा कि यह भाजपा के राजनीतिक चरित्र को उजागर करता है।
प्रमोद तिवारी ने कहा कि वह पिछले 45 वर्षों से संसद का हिस्सा रहे हैं, लेकिन ऐसा दुर्भाग्यपूर्ण दृश्य पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में विपक्षी नेताओं को रोकने और धमकाने की घटनाएं लोकतंत्र को कमजोर करती हैं। उनका कहना था कि संसद परिसर को युद्ध क्षेत्र की तरह दिखाया गया, जो भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं पर कलंक है।
उन्होंने नागालैंड की भाजपा महिला सांसद के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग के सदस्य भाजपा के पक्षपाती हैं और बिना स्पीकर की अनुमति के संसद की घटना पर स्वत: संज्ञान नहीं ले सकते। तिवारी ने गृह मंत्रालय को भी निशाने पर लिया और कहा कि अमित शाह के अधीन विभाग ने राहुल गांधी पर झूठे आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज कराई है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी ने किसी को धक्का नहीं दिया और यह कदम भाजपा की अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए उठाया गया है।
